मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब हूती संकट ने नए सुरक्षा समीकरण खड़े कर दिए हैं। यमन के ईरान समर्थित हूती लड़ाकों के हमलों के कारण सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हैं। हाल में हूती ने सऊदी अरब के खमीस मुशैत एयरबेस को निशाना बनाने का दावा किया। इसके बाद कई शहरों में सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए।
सऊदी अरब हूती संकट में पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच अगस्त 2026 में मक्का संयुक्त रक्षा समझौता हुआ था। इसके तहत किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमले को सभी पर हमला माना जाएगा। हालांकि, पाकिस्तान ने इस समझौते को रक्षात्मक बताया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब हूती संकट में संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण है।
वह रियाद का रक्षा सहयोगी है, लेकिन साथ ही ईरान के साथ भी कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए है।
इजरायल से खुफिया सहयोग की चर्चा
इस बीच कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सऊदी अरब ने हूती खतरे
से निपटने के लिए अमेरिकी सेंट्रल कमांड के माध्यम से इजरायल से खुफिया सहयोग मांगा है।
हालांकि, इसे औपचारिक सऊदी-इजरायल संबंधों की शुरुआत नहीं माना जा सकता।
अमेरिका ने भी फिलहाल सीधे बड़े सैन्य हमले के बजाय सऊदी अरब को खुफिया और टारगेटिंग सहायता देने पर सहमति जताई है।
हूती की गतिविधियों के कारण बाब अल-मंदेब और लाल सागर की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हो गई है।
यह समुद्री रास्ता वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।
FAQ
सवाल: सऊदी अरब हूती संकट क्यों बढ़ रहा है?
जवाब: हूती के मिसाइल और ड्रोन हमलों तथा यमन में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण तनाव बढ़ा है।
सवाल: क्या पाकिस्तान हूती के खिलाफ सीधे युद्ध में शामिल है?
जवाब: पाकिस्तान रक्षा सहयोगी है, लेकिन उसकी घोषित नीति प्रत्यक्ष युद्ध में उतरने से बचने और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की रही है।

