नई दिल्ली। दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता बन गया है। गुरुवार को राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 369 दर्ज किया गया। यह ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं, शुक्रवार से हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंचने की आशंका जताई गई है।
दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के कारण
राजधानी में प्रदूषण बढ़ने के पीछे वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों की धूल और औद्योगिक उत्सर्जन प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा, मौसम में बदलाव और हवा की धीमी गति प्रदूषक कणों को वातावरण में रोक सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण सांस संबंधी परेशानियां बढ़ा सकते हैं। इसलिए बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियां
दिल्ली में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए लोगों को अनावश्यक बाहरी गतिविधियों से बचना चाहिए।
बाहर निकलते समय अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क उपयोगी हो सकता है।
साथ ही, घर के अंदर धुआं पैदा करने वाली गतिविधियों से बचें। सांस लेने में गंभीर परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
प्रदूषण की स्थिति जानने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आधिकारिक AQI अपडेट देखें।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. दिल्ली में AQI 369 का क्या मतलब है?
उत्तर: AQI 369 ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ा सकता है।
प्रश्न 2. दिल्ली की हवा गंभीर कब मानी जाती है?
उत्तर: भारतीय AQI मानकों के अनुसार 401 से 500 तक का स्तर गंभीर श्रेणी में आता है।
प्रश्न 3. प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें?
उत्तर: बाहरी व्यायाम सीमित करें, N95 मास्क पहनें और आधिकारिक स्वास्थ्य सलाह का पालन करें।

