यमन में बढ़ते हूती-सऊदी संघर्ष के बीच सऊदी अरब ने अपनी हवाई सुरक्षा मजबूत करने के लिए सहयोगी देशों से मदद मांगी है। रिपोर्ट के अनुसार, रियाद ने फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से एयर डिफेंस सपोर्ट की मांग की है। सऊदी अरब के मिसाइल इंटरसेप्टर भंडार पर लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण दबाव बढ़ रहा है।
दो क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, सहायता का उद्देश्य हूती और अन्य ईरान समर्थित समूहों के हमलों से सुरक्षा बढ़ाना है। अमेरिका भी क्षेत्रीय युद्ध के दौरान इंटरसेप्टर मिसाइलों के घटते भंडार का सामना कर रहा है।
हूती-सऊदी संघर्ष में बढ़े मिसाइल और ड्रोन हमले
हूतियों ने हाल के दिनों में सऊदी ठिकानों पर कई हमलों का दावा किया है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने मारिब क्षेत्र में सऊदी F-15 लड़ाकू विमान गिराने का दावा भी किया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर, सऊदी अरब ने कहा कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन नष्ट किया।
सऊदी पक्ष ने इसके लिए हूतियों को जिम्मेदार बताया, जबकि हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया।
हूती-सऊदी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।
लाल सागर और बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में बढ़ता तनाव महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों के लिए चिंता बढ़ा रहा है।
वहीं, सऊदी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले के बाद तेल आपूर्ति को लेकर भी दबाव बढ़ा है।
FAQ
सवाल: सऊदी अरब ने किन देशों से मदद मांगी है?
जवाब: रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से एयर डिफेंस सहायता मांगी गई है।
सवाल: क्या हूतियों ने सऊदी F-15 गिराया है?
जवाब: हूतियों ने ऐसा दावा किया है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

