क्वाड देशों ने लॉन्च की ‘क्रिटिकल मिनरल्स पहल’, सप्लाई चेन की मजबूती और क्षेत्रीय समृद्धि पर जोर

“क्वाड देशों की अहम पहल: ‘क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव’ से इंडो-पैसिफिक में आर्थिक सहयोग को मिलेगी मजबूती”

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने वॉशिंगटन डीसी में आयोजित 10वीं क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक (QFMM) में एक नई रणनीतिक पहल ‘क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव’ की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित, विविध और टिकाऊ बनाना है, जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक अवसर और समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

इस बैठक में भारत के एस. जयशंकर, अमेरिका के मार्को रूबियो, जापान के ताकेशी इवाया और ऑस्ट्रेलिया की पेनी वोंग शामिल हुए। अमेरिकी विदेश विभाग की फैक्टशीट के अनुसार, यह पहल आर्थिक सुरक्षा और क्वाड देशों के सामूहिक लचीलेपन को मजबूत करेगी।

प्रमुख बिंदु:

  • ई-कचरे से खनिज पुनर्प्राप्ति: पहल के तहत ई-कचरे से खनिजों को दोबारा प्राप्त करने और पुनःप्रसंस्करण पर भी ज़ोर दिया जाएगा।
  • निजी निवेश को प्रोत्साहन: आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती लाने के लिए निजी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
  • समुद्री सुरक्षा सहयोग: बैठक में समुद्री निगरानी बढ़ाने और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण को प्राथमिकता दी गई। इसके तहत ‘क्वाड-एट-सी शिप ऑब्जर्वर मिशन’ शुरू किया गया है।
  • समुद्री क्षेत्र जागरूकता: ‘IPMDA’ कार्यक्रम के तहत समुद्री डाटा विश्लेषण और प्रशिक्षण के लिए सहयोग बढ़ेगा, जो भारतीय महासागर क्षेत्र तक फैलेगा।
  • MAITRI कार्यशाला: इस वर्ष आयोजित होने वाली इस कार्यशाला के जरिए क्षेत्रीय भागीदारों के साथ मिलकर समुद्री क्षमताओं का मूल्यांकन और विकास किया जाएगा।
  • ऊर्जा और बुनियादी ढांचा: ऊर्जा सुरक्षा, पारदर्शी बुनियादी ढांचे और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • मुंबई सम्मेलन: अक्टूबर 2025 में मुंबई में ‘क्वाड पोर्ट्स ऑफ द फ्यूचर पार्टनरशिप’ सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
  • डिजिटल सहयोग: अमेरिका और भारत इस वर्ष ‘अंडरसी केबल्स फोरम’ की मेजबानी करेंगे, जिसमें डिजिटल अवसंरचना और नियामक समन्वय पर चर्चा होगी।

बैठक में चारों देशों ने दोहराया कि उनका साझा लक्ष्य एक स्वतंत्र, खुला, समावेशी और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को सुनिश्चित करना है, जिससे न केवल उनके नागरिकों को लाभ हो, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता और विकास को बढ़ावा मिल सके।

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