उत्तर प्रदेश की राजनीति में UP Bulldozer Politics एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से भाजपा सरकार के कानून-व्यवस्था और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के संदेश से जुड़ा बुलडोजर अब समाजवादी पार्टी के राजनीतिक प्रचार में भी दिखाई दे रहा है।
रायबरेली में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पीडीए रथ यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं ने बुलडोजर से फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। इस दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि अबकी बार “वोट का बुलडोजर” चलेगा। सपा इसे अपने पीडीए राजनीतिक संदेश से जोड़ती दिखाई दे रही है।
दूसरी ओर, मेरठ में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के स्वागत के लिए सिवाया टोल प्लाजा पर बुलडोजर खड़े किए गए थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वह वहां नहीं रुके और बाद के स्वागत कार्यक्रमों में बुलडोजर दिखाई नहीं दिए। रिपोर्ट में उनकी नाराजगी की बात भी कही गई। हालांकि भाजपा ने बुलडोजर से दूरी बनाने की कोई आधिकारिक रणनीति घोषित नहीं की है।
UP Bulldozer Politics क्यों बनी चुनावी मुद्दा?
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बुलडोजर भाजपा के प्रचार में
कानून-व्यवस्था और सख्त प्रशासन के प्रतीक के रूप में उभरा था।
अब सपा इसी प्रतीक को अलग राजनीतिक अर्थ देने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।
आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले UP Bulldozer Politics दोनों
दलों के प्रचार और राजनीतिक बयानों में दिखाई दे सकती है।
फिलहाल भाजपा और सपा इस प्रतीक को अलग-अलग संदर्भों में इस्तेमाल कर रही हैं।
FAQ
सवाल: अखिलेश यादव ने बुलडोजर को लेकर क्या कहा?
जवाब: रायबरेली दौरे के दौरान उन्होंने “वोट का बुलडोजर” चलने की बात कही।
सवाल: क्या BJP ने बुलडोजर से दूरी बना ली है?
जवाब: भाजपा की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक रणनीति घोषित नहीं की गई है।

