नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026। भारत और फ्रांस अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं। दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां ISRO और CNES मिलकर TRISHNA उपग्रह मिशन पर काम कर रही हैं। भारत-फ्रांस संयुक्त अंतरिक्ष मिशन का उद्देश्य पृथ्वी की सतह के तापमान, जल संसाधनों और कृषि क्षेत्रों की स्थिति का अध्ययन करना है।
TRISHNA मिशन से जलवायु निगरानी को मिलेगी मजबूती
TRISHNA का पूरा नाम Thermal InfraRed Imaging Satellite for High-resolution Natural Resource Assessment है। यह उपग्रह आधुनिक तापीय अवरक्त तकनीक से पृथ्वी की सतह का अध्ययन करेगा।
इससे वैज्ञानिकों को बढ़ते तापमान, सूखे और वनस्पति में पानी की कमी से जुड़े आंकड़े मिल सकेंगे। साथ ही, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने में मदद मिलेगी।
भारत-फ्रांस संयुक्त अंतरिक्ष मिशन से किसानों को फायदा
यह मिशन कृषि क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। उपग्रह से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर फसलों की जल आवश्यकता और सिंचाई प्रबंधन का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।
इससे भविष्य में जल संरक्षण और कृषि योजनाओं को वैज्ञानिक आधार मिल सकता है।
फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी CNES के अनुसार, TRISHNA मिशन का प्रक्षेपण 2027 में प्रस्तावित है।
हालांकि, अंतिम तारीख आधिकारिक घोषणा पर निर्भर करेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1. TRISHNA मिशन क्या है?
उत्तर: यह भारत और फ्रांस का संयुक्त पृथ्वी अवलोकन उपग्रह मिशन है।
प्रश्न 2. TRISHNA उपग्रह कब लॉन्च होगा?
उत्तर: वर्तमान योजना के अनुसार इसका प्रक्षेपण 2027 में प्रस्तावित है।
प्रश्न 3. इस मिशन का मुख्य लाभ क्या होगा?
उत्तर: इससे तापमान निगरानी, कृषि जल प्रबंधन और जलवायु अनुसंधान में मदद मिलेगी।

