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देश की राजनीति में इन दिनों परिसीमन 2026 सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। सरकार द्वारा प्रस्तावित इस योजना के तहत लोकसभा सीटों का नया बंटवारा किया जा सकता है। खास बात यह है कि इस बार परिसीमन केवल 2011 की जनगणना पर आधारित नहीं होगा।
नई रिपोर्ट्स के अनुसार, परिसीमन 2026 में एक नया अनुपातिक फॉर्मूला अपनाया जाएगा। इसके तहत सभी राज्यों को फायदा देने की कोशिश की जाएगी। अनुमान है कि कई राज्यों में सीटों की संख्या 50% तक बढ़ सकती है। इससे संसद में प्रतिनिधित्व और मजबूत होगा।
सरकार का मानना है कि यह बदलाव देश की बढ़ती आबादी और संतुलित विकास को ध्यान में रखते हुए जरूरी है। वहीं विपक्ष इस प्रस्ताव को लेकर सवाल उठा रहा है। उनका कहना है कि इससे कुछ राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।
इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे बड़े राज्यों में सीटों में बड़ा इजाफा हो सकता है। वहीं दक्षिणी राज्यों को लेकर भी राजनीतिक बहस जारी है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. परिसीमन 2026 क्या है?
परिसीमन 2026 लोकसभा सीटों के नए बंटवारे की प्रक्रिया है, जिसमें राज्यों के प्रतिनिधित्व को फिर से तय किया जाएगा।
Q2. क्या यह 2011 की जनगणना पर आधारित होगा?
नहीं, इस बार परिसीमन 2026 में नया फॉर्मूला लागू किया जा सकता है।
Q3. क्या सीटों की संख्या बढ़ेगी?
हाँ, प्रस्ताव के अनुसार सीटों में 50% तक बढ़ोतरी संभव है।
Q4. विपक्ष क्यों विरोध कर रहा है?
विपक्ष को डर है कि कुछ राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।