लेखक उत्पल कुमार अपनी नई किताब ‘Eminent Distorians: Twists and Truths’ में इतिहास के नए पहलुओं से पाठकों को परिचित करवा रहे हैं

लेखक और पत्रकार उत्पल कुमार अपनी नई किताब ‘Eminent Distorians: Twists and Truths’ के माध्यम से इतिहास के कुछ अनछुए पहलुओं से पाठकों को रूबरू करवा रहे हैं। इससे पहले उनकी किताब ‘Bharat Rising: Dharma, Democracy, Diplomacy’ भी काफी चर्चा में रही थी। नई किताब ‘Eminent Distorians’ में उत्पल कुमार ने ऐतिहासिक तथ्यों और किताबों के उद्धरणों के जरिए इतिहास के तथ्यों के साथ हुई छेड़छाड़ पर विस्तार से चर्चा की है।

किताब के नाम में ही लेखक ने ‘इतिहास के साथ छेड़छाड़’ का संदेश दे दिया है, क्योंकि ‘Distorians’ का मतलब है किसी घटना को तोड़-मरोड़ कर पेश करने वाला। उत्पल कुमार का कहना है कि भारत के कुछ प्रमुख इतिहासकारों ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया है। इस किताब में वह उदाहरणों के माध्यम से यह बताते हैं कि भारतीय इतिहास को गलत तरीके से पेश किया गया है।

किताब की शुरुआत में उत्पल कुमार इंदिरा गांधी के समय की प्रसिद्ध ‘टाइम कैप्सूल’ की घटना का जिक्र करते हैं, जिसमें वह उस समय के इतिहासकारों के दोहरे चरित्र का पर्दाफाश करते हैं। साथ ही, वह बताते हैं कि कैसे इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए एक इतिहास की किताब लिखवाई थी, जिसमें केवल उनके और जवाहरलाल नेहरू का ही जिक्र था।

किताब में इतिहासकार बिपिन चंद्रा के समर्थन का भी जिक्र किया गया है, जिन्होंने इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए इमरजेंसी का समर्थन किया और जयप्रकाश नारायण को दोषी ठहराया। उत्पल कुमार अपनी किताब के पहले चैप्टर में यह भी कहते हैं कि भारतीय वैदिक संस्कृति और हड़प्पा सभ्यता एक ही सिक्के के दो पहलू थे, न कि अलग-अलग।

उत्पल कुमार ने आर्य आक्रमण सिद्धांत का भी खंडन किया है, जिसमें कहा गया था कि आर्य आक्रमणकारी थे या पलायन करके भारत आए थे। वह कहते हैं कि इस बात का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है। इसके साथ ही, वह भारतीय संस्कृति के फैलाव को भी विस्तार से बताते हैं, जो मध्य एशियाई देशों से लेकर जापान तक फैली थी।

किताब में मौर्य काल और गुुप्त काल का भी जिक्र किया गया है, खासकर गुुप्त काल के बारे में उत्पल कुमार का कहना है कि वामपंथी इतिहासकारों ने इसे भारत का स्वर्ण काल नहीं माना, बल्कि वह इसे उस समय मानते हैं जब जाति व्यवस्था खत्म हो जाए।

इसके अलावा, उत्पल कुमार भारतीय राजाओं के मुगलों से संघर्ष पर भी चर्चा करते हैं और कहते हैं कि भारतीय राजाओं ने मुगलों से बड़ी बहादुरी से लड़ा और कई बार उन्हें हराया भी। वह यह भी कहते हैं कि 1100 में मोहम्मद कासिम के हमले से पहले भी भारत पर मुसलमानों ने कई हमले किए, जिनमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

अंत में, उत्पल कुमार 1857 की लड़ाई और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र करते हैं। उनका कहना है कि महात्मा गांधी की भूमिका स्वतंत्रता संग्राम में सीमित थी और उस समय के इतिहासकारों ने सावरकर, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह की भूमिका को कम करके पेश किया।

उत्पल कुमार अपनी किताब के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश करते हैं कि भारत का असल इतिहास आज भी सामने नहीं आया है। उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के बाद भी भारत के असल इतिहास को उजागर करने की कोई ठोस कोशिश नहीं की गई है।

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