वॉशिंगटन, 29 अक्टूबर 2026। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी प्रमुख ब्याज दर 3.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के दायरे में बरकरार रखी है। 28 अक्टूबर को फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक में यह फैसला लिया गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दर का यह निर्णय वैश्विक वित्तीय बाजारों और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है।
ब्याज दर स्थिर रखने की वजह
फेडरल रिजर्व अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महंगाई, रोजगार और आर्थिक विकास के आंकड़ों के आधार पर मौद्रिक नीति तय करता है। ब्याज दरों को स्थिर रखने से मौजूदा नीतिगत स्थिति बनी रहती है।
हालांकि, भविष्य में दरें बढ़ेंगी या घटेंगी, यह आगामी आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा। निवेशक अब फेडरल रिजर्व के अगले संकेतों पर नजर रख रहे हैं।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दर का भारत पर असर
अमेरिकी ब्याज दरों का प्रभाव भारतीय शेयर बाजार, डॉलर और रुपये की विनिमय दर पर पड़ सकता है। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर सकती हैं।
इससे भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश का प्रवाह प्रभावित होने की संभावना रहती है।
हालांकि, घरेलू आर्थिक परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर कितनी रखी है?
उत्तर: 28 अक्टूबर 2026 के फैसले के अनुसार प्रमुख ब्याज दर 3.75% से 4% के दायरे में बरकरार है।
प्रश्न 2: क्या इसका भारतीय शेयर बाजार पर असर पड़ेगा?
उत्तर: हां, डॉलर की चाल और विदेशी निवेश के माध्यम से असर पड़ सकता है।
प्रश्न 3: फेडरल रिजर्व की अगली बैठक कब होगी?
उत्तर: अगली निर्धारित FOMC बैठक दिसंबर 2026 में है।

