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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्य सरकारों से एमएसपी से नीचे कोई खरीद नहीं करने का किया आग्रह

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2024-25 के लिए किसानों के समर्थन की नई योजनाओं का ऐलान किया

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को महत्वपूर्ण घोषणा की, जिसमें सरकार ने 2024-25 के लिए राज्य के उत्पादन के 100% मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत तुअर, उड़द और मसूर की खरीद को मंजूरी दी है। इसके अलावा, 2025 रबी विपणन सत्र के लिए 37.39 लाख टन चना और मसूर तथा 28.28 लाख टन सरसों की खरीद की स्वीकृति भी दी गई है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत सरकार ने किसानों से एमएसपी (MSP) से नीचे कोई खरीद न हो, यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

मंत्री ने बताया कि आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना में नैफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से एमएसपी पर खरीद जारी है, और 25 मार्च 2025 तक इन राज्यों में कुल 2.46 लाख मीट्रिक टन तुअर (अरहर) की खरीद की गई है, जिससे 1,71,569 किसानों को लाभ हुआ है। वहीं उत्तर प्रदेश में तुअर की कीमत वर्तमान में एमएसपी से ऊपर चल रही है।

कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि भारत सरकार केंद्रीय नोडल एजेंसियों के माध्यम से 100% तुअर की खरीद के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही पीएम-आशा योजना को 2025-26 तक बढ़ाया गया है, जिसके तहत किसानों से दालों और तिलहनों की खरीद एमएसपी पर जारी रहेगी। उन्होंने यह जानकारी भी दी कि आरएमएस 2025 के दौरान चने, सरसों और मसूर की कुल स्वीकृत खरीद मात्रा 27.99 लाख मीट्रिक टन चना, 28.28 लाख मीट्रिक टन सरसों और 9.40 लाख मीट्रिक टन मसूर होगी। प्रमुख राज्यों में राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात शामिल हैं।

केंद्रीय मंत्री ने किसानों के हित में कर्नाटक में खरीद अवधि को 90 दिनों से बढ़ाकर 1 मई तक करने की स्वीकृति दी है। इसके अलावा, सरकार ने किसानों की पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए नैफेड और एनसीसीएफ पोर्टलों का उपयोग सुनिश्चित किया है।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने बजट 2025 में यह भी घोषणा की है कि देश में दालों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए 2028-29 तक तुअर, उड़द और मसूर की 100% खरीद की जाएगी।

इस योजना से किसानों को वित्तीय सुरक्षा मिलने के साथ-साथ सरकार का यह कदम कृषि क्षेत्र को मजबूती प्रदान करेगा और दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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