NationalNews

विचार प्रवाह: भ्रष्टाचार के अंधेरे से बाहर निकालने की चुनौती

भ्रष्टाचार: अंधेरे से उजाले की ओर बढ़ने की चुनौती

भ्रष्टाचार आज किसी एक देश, समाज या प्रांत तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि यह वैश्विक संकट बन चुका है। इसने न केवल व्यवस्थाओं को दूषित किया है, बल्कि व्यक्ति की ईमानदारी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। भ्रष्टाचार के उन्मूलन के लिए सिर्फ प्रतीक्षा करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस प्रक्रियाओं को अपनाना होगा। सत्ता और स्वार्थ के चलते भ्रष्टाचार मिटाने के प्रयासों में अक्सर नैतिक कमजोरी देखने को मिलती है।

हाल ही में संसद में नोटों के बंडल मिलने जैसी घटनाएं इस नैतिक पतन का बड़ा उदाहरण हैं। यह घटनाएं हमें 2008 के अविश्वास प्रस्ताव की याद दिलाती हैं, जब तत्कालीन सरकार को बचाने के लिए सांसदों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगे थे। ऐसी घटनाओं ने जनता का विश्वास इस कदर तोड़ दिया है कि अब किसी के सच बोलने पर भी संदेह होता है।

वैश्विक समस्या और इसके प्रभाव

भ्रष्टाचार एक गंभीर अपराध है, जो न केवल सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करता है, बल्कि आर्थिक और नैतिक विकास को भी बाधित करता है। यह राजनीतिक स्थिरता को कमजोर करता है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को हिलाकर रख देता है। यही कारण है कि इस मुद्दे को वैश्विक स्तर पर भी गंभीरता से लिया जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र ने इस समस्या की विकरालता को समझते हुए “अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस” मनाने की पहल की है। इस वर्ष की थीम है:
“भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं के साथ एकजुट होना: कल की ईमानदारी को आकार देना।”

इस थीम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों का नेतृत्व करने के लिए प्रेरित और सशक्त बनाना है।

ईमानदारी और पारदर्शिता की दिशा में कदम

दुनिया के कई देशों ने भ्रष्टाचार मुक्त शासन की मिसाल पेश की है। भारत में भी पारदर्शिता और ईमानदार कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयास किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “न खाऊंगा, न खाने दूंगा” का संकल्प इस दिशा में बड़ा कदम है। हालांकि, अभी तक भ्रष्टाचार पर पूरी तरह नियंत्रण पाने में हम सफल नहीं हो पाए हैं।

युवाओं की भूमिका

भ्रष्टाचार से मुक्त समाज का सपना तभी साकार होगा जब युवा वर्ग इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएगा। पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक मूल्यों को अपनाते हुए हमें एक ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जहां ईमानदारी ही समाज का आधार बने।

निष्कर्ष:
भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। युवा पीढ़ी को जागरूक बनाकर, पारदर्शी नीतियां अपनाकर और सख्त कानूनों के माध्यम से हम इस अंधेरे से बाहर निकल सकते हैं। ईमानदारी, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ एक उज्ज्वल और भ्रष्टाचार मुक्त भविष्य संभव है।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *