नई दिल्ली, 2 नवंबर 2026। सुप्रीम कोर्ट में नई प्रक्रिया आज से प्रभावी हो गई है। इसके तहत वरिष्ठ अधिवक्ता अब अदालत में मामलों की तत्काल सुनवाई के लिए मौखिक रूप से अनुरोध नहीं कर सकेंगे। वहीं, जूनियर और युवा अधिवक्ताओं को मौखिक मेंशनिंग के अधिक अवसर मिलेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने 27 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में सर्कुलर जारी किया था। नई व्यवस्था का उद्देश्य अदालत की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित करना और युवा वकीलों की भागीदारी बढ़ाना है।
सुप्रीम कोर्ट में नई प्रक्रिया से क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता किसी मामले की तत्काल सुनवाई के लिए सीधे मौखिक मेंशनिंग नहीं कर सकेंगे। हालांकि, वे नियमित सुनवाई में पहले की तरह बहस और पैरवी कर सकेंगे।
तत्काल सुनवाई के लिए अधिवक्ताओं को निर्धारित नियमों और दस्तावेजी प्रक्रिया का पालन करना होगा। इसके अलावा, जूनियर वकीलों को अदालत में अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।
तत्काल सुनवाई पर क्या होगा असर?
मौखिक मेंशनिंग के जरिए अधिवक्ता किसी जरूरी मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध करते हैं।
हालांकि, सुनवाई की अनुमति अदालत के निर्णय पर निर्भर करती है।
इस बदलाव से याचिकाकर्ताओं के न्यायिक अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।
अधिवक्ताओं को संबंधित सर्कुलर और समयसीमा का ध्यान रखना होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: सुप्रीम कोर्ट की नई व्यवस्था कब लागू हुई?
उत्तर: यह व्यवस्था 2 नवंबर 2026 से प्रभावी हुई।
प्रश्न 2: क्या वरिष्ठ अधिवक्ता अब अदालत में बहस नहीं कर सकेंगे?
उत्तर: वे सामान्य सुनवाई में बहस कर सकेंगे। प्रतिबंध केवल मौखिक मेंशनिंग से संबंधित है।
प्रश्न 3: क्या जूनियर अधिवक्ता तत्काल सुनवाई का अनुरोध कर सकते हैं?
उत्तर: हां, निर्धारित नियमों के अनुसार जूनियर अधिवक्ताओं को मौखिक मेंशनिंग के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

