राज्यसभा सभापति विवाद को लेकर दिसंबर 2024 में संसद की राजनीति गरमा गई थी। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तत्कालीन सभापति जगदीप धनखड़ की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि विपक्ष को सदन में अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा। The Indian Express
कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी दलों ने धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद से हटाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 67(b) के तहत नोटिस भी दिया था। विपक्ष ने उनके आचरण को पक्षपातपूर्ण बताया था। mint
राज्यसभा सभापति विवाद पर खरगे ने क्या कहा?
मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया था कि सदन में नियमों के मुकाबले राजनीति को प्राथमिकता मिल रही है। उन्होंने धनखड़ की कार्यशैली की तुलना स्कूल के हेडमास्टर से की और कहा कि अनुभवी विपक्षी नेताओं को बोलने से रोका जाता है। mint
खरगे ने यह आरोप भी लगाया कि सभापति का व्यवहार सरकार के पक्ष में दिखाई देता है। हालांकि ये कांग्रेस और विपक्ष की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप थे।
विपक्ष ने क्यों दिया था नोटिस?
विपक्षी दलों का कहना था कि उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा था।
उन्होंने सभापति की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।
दूसरी ओर, सत्तापक्ष ने विपक्ष के इस कदम की आलोचना की थी। The Indian Express
राज्यसभा सभापति विवाद उस समय संसद के शीतकालीन सत्र का प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गया था।
विवाद के केंद्र में सदन के संचालन, विपक्ष को बोलने का अवसर और सभापति की संवैधानिक भूमिका जैसे सवाल थे।
FAQ
राज्यसभा सभापति विवाद किससे जुड़ा था?
यह विवाद तत्कालीन सभापति जगदीप धनखड़ की कार्यशैली को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़ा था।
मल्लिकार्जुन खरगे ने क्या आरोप लगाया था?
खरगे ने धनखड़ पर विपक्ष के साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने और सदन में बोलने से रोकने के आरोप लगाए थे।

