मोंगला पोर्ट पर चीन-बांग्लादेश की साझेदारी, भारत की रणनीतिक चिंता क्यों बढ़ी?

बंगाल की खाड़ी में स्थित मोंगला पोर्ट, चीन और बांग्लादेश के झंडों के साथ कंटेनर टर्मिनल, कार्गो जहाज और पृष्ठभूमि में भारत का मानचित्र दिखाता हुआ एक यथार्थवादी समाचार दृश्य।मोंगला पोर्ट के विकास में चीन-बांग्लादेश की साझेदारी से भारत की रणनीतिक चिंता बढ़ी।

मोंगला पोर्ट को भारत लंबे समय से पूर्वोत्तर राज्यों तक आसान समुद्री संपर्क के लिए महत्वपूर्ण मानता रहा है। हाल ही में चीन और बांग्लादेश के बीच मोंगला पोर्ट के आधुनिकीकरण और विस्तार को लेकर सहमति बनने के बाद भारत की रणनीतिक चिंताएं बढ़ गई हैं। यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा और बंगाल की खाड़ी में शक्ति संतुलन पर भी पड़ सकता है।

भारत ने पहले बांग्लादेश के साथ हुए समझौतों के तहत मोंगला पोर्ट का उपयोग पूर्वोत्तर राज्यों तक सामान पहुंचाने के लिए किया था। इससे परिवहन आसान होने के साथ-साथ सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी “चिकेन नेक” पर निर्भरता कम करने की उम्मीद थी। अब चीन की बढ़ती भागीदारी को भारत रणनीतिक नजरिए से देख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह निवेश उसकी बेल्ट एंड रोड पहल को और मजबूत करेगा। वहीं भारत के लिए यह जरूरी होगा कि वह बांग्लादेश के साथ अपने आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाए। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार और संपर्क परियोजनाएं अभी भी जारी हैं।

FAQ

प्रश्न 1: मोंगला पोर्ट कहां स्थित है?
उत्तर: मोंगला पोर्ट बांग्लादेश के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित प्रमुख समुद्री बंदरगाह है।

प्रश्न 2: भारत के लिए मोंगला पोर्ट क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: इससे पूर्वोत्तर भारत तक समुद्री संपर्क आसान और कम खर्चीला बनता है।

प्रश्न 3: चीन की भूमिका क्यों चर्चा में है?
उत्तर: चीन मोंगला पोर्ट के आधुनिकीकरण और विस्तार परियोजना में सहयोग कर रहा है।

Prem Chand | Vishwas Prakash

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