धर्म एवं आस्था: शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप, मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि माता की आराधना से भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और मानसिक शांति प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है।
मां चंद्रघंटा की पूजा का धार्मिक महत्व
मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है। इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। देवी सिंह पर सवार हैं और उनके दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र तथा धार्मिक प्रतीक दिखाई देते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता का यह स्वरूप शक्ति, साहस और करुणा का प्रतीक है। श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं।
मां चंद्रघंटा की पूजा विधि और प्रिय भोग
नवरात्र के तीसरे दिन भक्त सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनते हैं। इसके बाद पूजा स्थल पर दीपक जलाकर देवी को पुष्प, अक्षत, रोली और चंदन अर्पित करते हैं।
माता को दूध, खीर और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाने की परंपरा है।
पूजा के दौरान श्रद्धालु “ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः” मंत्र का जाप करते हैं।
नवरात्र के तीसरे दिन की शुभकामनाएं
इस पावन अवसर पर लोग अपने परिवार और मित्रों को शुभकामना संदेश भेजते हैं।
मंदिरों में भजन-कीर्तन और विशेष आरती भी आयोजित की जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: नवरात्र के तीसरे दिन किस देवी की पूजा होती है?
उत्तर: तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है।
प्रश्न 2: मां चंद्रघंटा को कौन-सा भोग प्रिय है?
उत्तर: धार्मिक परंपराओं में दूध और खीर का भोग प्रमुख माना जाता है।
प्रश्न 3: मां चंद्रघंटा का मंत्र क्या है?
उत्तर: “ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः।”

