कर्नाटक SC-ST आरक्षण पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 50% सीमा पार करने वाले प्रावधान असंवैधानिक

कर्नाटक हाईकोर्ट SC-ST आरक्षण फैसला 2026 और 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा विवादकर्नाटक हाईकोर्ट ने SC-ST आरक्षण बढ़ाने वाले कानून के विवादित प्रावधानों को असंवैधानिक माना।कर्नाटक हाईकोर्ट ने SC-ST आरक्षण बढ़ाने वाले कानून के विवादित प्रावधानों को असंवैधानिक माना।

बेंगलुरु, 13 अक्टूबर 2026। कर्नाटक SC-ST आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने वर्ष 2022 में आरक्षण बढ़ाने वाले कानून के विवादित प्रावधानों को असंवैधानिक माना है। मामला कुल आरक्षण को 50 प्रतिशत की सामान्य न्यायिक सीमा से ऊपर ले जाने से जुड़ा है।

कर्नाटक SC-ST आरक्षण में क्या बदलाव हुआ था?

कर्नाटक सरकार ने वर्ष 2022 में अनुसूचित जाति (SC) का आरक्षण 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत किया था। वहीं, अनुसूचित जनजाति (ST) का आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया गया था।

इस बदलाव के बाद अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण मिलाकर कुल आरक्षण 56 प्रतिशत पहुंच गया था। इसके बाद कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई।

हाईकोर्ट ने 50 प्रतिशत सीमा पर क्या कहा?

अदालत ने आरक्षण की अधिकतम सीमा से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक सिद्धांतों को महत्वपूर्ण माना।

वर्ष 1992 के इंद्रा साहनी मामले में सामान्य परिस्थितियों के लिए 50 प्रतिशत की सीमा निर्धारित की गई थी।

कर्नाटक SC-ST आरक्षण मामले में अदालत के फैसले से सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों की आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।

हालांकि, इस निर्णय का अर्थ SC-ST आरक्षण पूरी तरह समाप्त होना नहीं है।

राज्य सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती देने का विकल्प मौजूद है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: कर्नाटक में SC-ST आरक्षण कितना बढ़ाया गया था?

उत्तर: SC आरक्षण 17 प्रतिशत और ST आरक्षण 7 प्रतिशत किया गया था।

प्रश्न 2: क्या हाईकोर्ट के फैसले से सभी आरक्षित नियुक्तियां रद्द होंगी?

उत्तर: ऐसा स्वतः नहीं होगा। नियुक्तियों पर प्रभाव अदालत के विस्तृत आदेश और संबंधित सरकारी निर्देशों पर निर्भर करेगा।

DEVIDAS | VISHWAS PRAKASH

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