वरासत दर्ज शिकायत पर जिलाधिकारी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारी को कार्रवाई के निर्देश दिए। शिकायतकर्ता सुरेंद्र कुमार ने अपनी समस्या प्रशासन के सामने रखी थी। इसके बाद सहायक चकबंदी अधिकारी, शाहगंज को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा गया।
निर्देश मिलने के बाद संबंधित विभाग ने प्रकरण की जांच शुरू की। इसके बाद 11 दिसंबर 2024 को प्रार्थी सुरेंद्र कुमार की वरासत दर्ज की गई। साथ ही संबंधित अभिलेख भी उपलब्ध कराया गया।
वरासत दर्ज शिकायत का प्राथमिकता से निस्तारण
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वरासत दर्ज शिकायत, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और भूमि विवाद जैसे जनहित से जुड़े मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए।
उन्होंने कहा कि आम लोगों को अपने जरूरी कार्यों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। अधिकारी शिकायतों को गंभीरता से सुनें और नियमों के अनुसार समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करें।
विवादित वरासत मामलों पर 48 घंटे में रिपोर्ट
चकबंदी विभाग के अधिकारियों को विवादित वरासत से जुड़े मामलों में भी तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। ऐसे मामलों की जांच कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
प्रशासन का उद्देश्य शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण करना और
पात्र व्यक्ति को आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराना है।
इससे राजस्व और भूमि संबंधी मामलों में लोगों को समय पर सहायता मिल सकेगी।
फोन पर मिली शिकायत के बाद कार्रवाई
इस मामले में शिकायत प्रशासन तक पहुंचने के बाद
संबंधित अधिकारी को आवश्यक निर्देश जारी किए गए।
इसके बाद वरासत दर्ज शिकायत पर कार्रवाई
करते हुए अभिलेखों की प्रक्रिया पूरी की गई।
हालांकि जमीन और वरासत से जुड़े मामलों में
प्रत्येक प्रकरण के दस्तावेज और परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।
इसलिए संबंधित व्यक्ति को अपने क्षेत्र के राजस्व
या चकबंदी कार्यालय से आधिकारिक जानकारी लेना जरूरी है।
FAQ
वरासत दर्ज कराने के लिए कहां संपर्क करें?
क्षेत्र और भूमि की स्थिति के अनुसार संबंधित राजस्व, तहसील या चकबंदी कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
शिकायत के बाद क्या कार्रवाई हुई?
दिए गए विवरण के अनुसार, संबंधित अधिकारी को कार्रवाई के निर्देश दिए गए और बाद में वरासत दर्ज कर अभिलेख उपलब्ध कराया गया।

