वित्त वर्ष 2027 तक भारत की छत सौर ऊर्जा क्षमता 25-30 गीगावाट तक पहुंच जाएगी : रिपोर्ट
“वित्त वर्ष 2025 से 2027 तक भारत में रूफटॉप सोलर ऊर्जा का बढ़ता विस्तार“
भारत में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025 और 2027 के बीच देश की रूफटॉप सोलर क्षमता 17 गीगावाट से बढ़कर 25 से 30 गीगावाट तक पहुंच सकती है। यह वृद्धि भारत के ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे व्यापक परिवर्तन और हरित भविष्य की ओर अग्रसर रणनीतियों का हिस्सा है।
हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार द्वारा 2025 तक 220 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 2030 तक 300 गीगावाट सौर ऊर्जा का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें रूफटॉप सोलर, विशेषकर कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल (C&I) सेक्टर में, अहम भूमिका निभा रहा है।
विकास के प्रमुख कारक
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक भारत में रूफटॉप सोलर की स्थापित क्षमता 17.02 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। इस विकास की रफ्तार को कई कारक प्रभावित कर रहे हैं:
- कम होती तकनीकी लागत
- नेट मीटरिंग जैसी योजनाएं
- पीएलआई (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) स्कीम
- परिचालन खर्च में कमी
- स्थायित्व के प्रति बढ़ती जागरूकता
इन सबके बीच, केंद्र सरकार द्वारा फरवरी 2024 में शुरू की गई ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (PMSGMBY)’ ने विशेष रूप से आवासीय क्षेत्रों में सौर ऊर्जा अपनाने को नई गति दी है। इस योजना के तहत एक करोड़ घरों तक 78,000 रुपये तक की सब्सिडी के साथ रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
अब तक की उपलब्धियां और आगे की दिशा
10 मार्च 2025 तक, इस योजना के अंतर्गत 10 लाख से अधिक घरों में सौर पैनल लगाए जा चुके हैं। चंडीगढ़ और दमन एवं दीव जैसे केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने सभी सरकारी भवनों की छतों पर सौर ऊर्जा प्रणालियां लगाकर 100% लक्ष्य प्राप्त कर लिया है।
राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्य भी इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
रोजगार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा ही नहीं, यह योजना लगभग 17 लाख नई नौकरियां भी सृजित करने की दिशा में काम कर रही है। इससे न केवल घरेलू अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि भारत वैश्विक हरित ऊर्जा मानचित्र पर भी एक सशक्त उपस्थिति दर्ज करेगा।
