नई दिल्ली: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत-वियतनाम संबंध को भारत की विदेश नीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि वियतनाम भारत की ‘Act East Policy’, समुद्री दृष्टिकोण और Indo-Pacific रणनीति का एक प्रमुख साझेदार है।
नई दिल्ली में व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग पर भारत-वियतनाम संयुक्त आयोग की 19वीं बैठक आयोजित हुई।
इसकी सह-अध्यक्षता करते हुए जयशंकर ने दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि ASEAN के साथ भारत की व्यापक रणनीतिक साझेदारी में भी वियतनाम की अहम भूमिका है।
भारत-वियतनाम संबंधों में सहयोग बढ़ाने पर जोर
जयशंकर के अनुसार, संयुक्त आयोग की बैठक दोनों देशों के बीच हुए समझौतों और फैसलों की प्रगति की समीक्षा करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
साथ ही, उच्च स्तर पर बनी राजनीतिक सहमति को ठोस नतीजों में बदलने की दिशा में भी यह बैठक अहम है।
भारत और वियतनाम व्यापार, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, तकनीक और रणनीतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में अपनी साझेदारी को आगे बढ़ा रहे हैं।
Indo-Pacific क्षेत्र में बदलते हालात के बीच दोनों देशों के संबंधों का महत्व और बढ़ा है।
विदेश मंत्री के बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में भारत-वियतनाम संबंध आर्थिक सहयोग के साथ रणनीतिक स्तर पर भी और मजबूत हो सकते हैं।
FAQ
सवाल: भारत के लिए वियतनाम क्यों महत्वपूर्ण है?
जवाब: वियतनाम भारत की Act East Policy, Indo-Pacific रणनीति और ASEAN सहयोग में महत्वपूर्ण साझेदार है।
सवाल: भारत-वियतनाम संयुक्त आयोग की बैठक कहां हुई?
जवाब: संयुक्त आयोग की 19वीं बैठक नई दिल्ली में आयोजित हुई।
सवाल: बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
जवाब: समझौतों की प्रगति की समीक्षा और राजनीतिक सहमति को ठोस परिणामों में बदलना इसका प्रमुख उद्देश्य रहा।

