नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट ने आर्थिक जगत का ध्यान खींचा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 4 सितंबर को देश का विदेशी मुद्रा भंडार 785.71 अरब डॉलर था, जो 2 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में घटकर करीब 734.6 अरब डॉलर रह गया। इस दौरान लगभग 51.11 अरब डॉलर की कमी दर्ज हुई।
विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट की वजह क्या है?
भारतीय रुपये पर दबाव और विदेशी मुद्रा बाजार में रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप को इस कमी के प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है। रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए RBI डॉलर की बिक्री कर सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की निकासी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी मुद्रा बाजार को प्रभावित करती है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
विदेशी मुद्रा भंडार कम होने से रुपये की स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं। यदि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो कच्चे तेल और अन्य आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ सकती है।
हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार केवल भंडार में कमी को आर्थिक संकट का संकेत नहीं मानना चाहिए।
भारत के पास अभी भी बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. विदेशी मुद्रा भंडार कितना घटा है?
उत्तर: उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 51.11 अरब डॉलर की कमी दर्ज हुई।
प्रश्न 2. विदेशी मुद्रा भंडार कौन संभालता है?
उत्तर: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इसका प्रबंधन करता है।
प्रश्न 3. क्या इससे महंगाई बढ़ सकती है?
उत्तर: रुपये की कमजोरी से आयात महंगा होने पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।

