आयकर अधिनियम, 2025 : भारत के नए कर ढांचे की नींव, 1 अप्रैल, 2026 से होगा प्रभावी
“सरलीकृत कर व्यवस्था की दिशा में ऐतिहासिक कदम – आयकर अधिनियम, 2025”
भारत सरकार ने आयकर अधिनियम, 2025 को लागू कर देश के कर ढांचे में एक ऐतिहासिक सुधार किया है। इसका मुख्य उद्देश्य कर प्रणाली को पारदर्शी, सरल और आधुनिक बनाना है, ताकि करदाता के लिए अनुपालन आसान हो और प्रशासनिक बोझ कम हो सके।
1. पृष्ठभूमि
- 1961 का आयकर अधिनियम समय-समय पर संशोधनों से जटिल होता चला गया था।
- छह दशकों में इसमें 4000 से अधिक संशोधन किए गए, जिससे भाषा कठिन और संरचना खंडित हो गई।
- कई छूट और प्रोत्साहन दिए जाने से कर आधार संकुचित हो गया और मुकदमेबाजी बढ़ी।
2. सुधार प्रक्रिया
- जुलाई 2024 में सरकार ने कानून को सरल बनाने की घोषणा की।
- CBDT की समिति ने उद्योग, पेशेवर निकायों और अधिकारियों से सुझाव लेकर अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन किया।
- तीन मार्गदर्शक सिद्धांत अपनाए गए:
- सरल भाषा और स्पष्ट संरचना
- कर नीति में निरंतरता और स्थिरता
- कर दरों में बिना बदलाव केवल अनुभव सुधार
3. अधिनियम की प्रमुख विशेषताएं
- सरल भाषा व संरचना – जटिल और लंबी धाराओं को हटाकर संक्षिप्त रूप दिया गया।
- कर वर्ष (Tax Year) – अब वित्त वर्ष और आकलन वर्ष की जगह केवल एक ही अवधारणा होगी, जिससे भ्रम कम होगा।
- डिजिटल एकीकरण – फेसलेस मूल्यांकन, ऑनलाइन अनुपालन और विवाद समाधान की नई व्यवस्था।
- टीडीएस प्रावधानों का एकीकरण – अब इन्हें एक ही धारा (धारा 393) में लाया गया है।
- वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्तियां – क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल संपत्तियों को स्पष्ट परिभाषा में शामिल किया गया।
- सरल विवाद समाधान – करदाता-अनुकूल प्रणाली से मुकदमेबाजी घटेगी।
4. उद्देश्य
- सरलीकरण – पुरानी कानूनी भाषा को आधुनिक शब्दों में ढालना।
- डिजिटल फर्स्ट – तकनीक के उपयोग से पारदर्शिता और दक्षता।
- करदाता केंद्रित दृष्टिकोण – स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहन।
- वैश्विक तालमेल – डिजिटल परिसंपत्तियों और वैश्विक आय पर स्पष्ट प्रावधान।
5. महत्व
यह अधिनियम केवल कर दरों को बदलने का प्रयास नहीं करता, बल्कि पूरे कर अनुभव को सरल, अनुमानित और डिजिटल रूप से सक्षम बनाने की दिशा में कदम है। इससे भारत का कर ढांचा न केवल घरेलू आवश्यकताओं बल्कि वैश्विक मानकों के अनुरूप भी हो जाएगा।
