BRICS सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने एकीकृत बाजार और ओपन-सोर्स AI प्लेटफॉर्म विकसित करने का प्रस्ताव रखा है। इस BRICS चीनी AI प्रस्ताव को लेकर भारत में सतर्कता दिखाई दे रही है। चीन को आगामी BRICS सम्मेलन की अध्यक्षता मिलने वाली है। ऐसे में इन मुद्दों को अगले एजेंडे में प्रमुखता से शामिल किया जा सकता है।
चीन के पांच सूत्रीय प्लान में सदस्य देशों के बीच बाजारों को जोड़ने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। हालांकि, भारत के लिए व्यापार संतुलन, घरेलू उद्योग और डेटा सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
चीनी सामान को लेकर भारत की चिंता
यदि BRICS देशों के बीच टैरिफ कम करके बाजारों को ज्यादा खोला जाता है, तो भारतीय बाजार में चीनी सामान की मौजूदगी बढ़ सकती है। इससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और स्थानीय कंपनियों पर दबाव पड़ने की आशंका है।
भारत ने नवंबर 2019 में RCEP से बाहर रहने का फैसला भी घरेलू आर्थिक हितों से जुड़ी चिंताओं के बीच लिया था। इसके बाद भारत ने ऑस्ट्रेलिया, यूएई और अन्य भागीदारों के साथ व्यापारिक समझौतों पर जोर बढ़ाया।
BRICS चीनी AI प्रस्ताव पर क्यों उठ रहे सवाल?
शी चिनफिंग ने चीन के AI और लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही है।
भारत के लिए डेटा सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता यहां अहम हैं।
भारत पहले भी सुरक्षा कारणों से कई चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा चुका है।
इसलिए BRICS चीनी AI प्रस्ताव पर आगे होने वाली बातचीत में भारत तकनीकी पारदर्शिता,
साइबर सुरक्षा और घरेलू हितों को प्राथमिकता दे सकता है।
FAQ
सवाल: BRICS चीनी AI प्रस्ताव क्या है?
जवाब: इसमें BRICS देशों के बीच AI सहयोग और ओपन-सोर्स AI प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने की बात शामिल है।
सवाल: भारत इस प्रस्ताव को लेकर सतर्क क्यों है?
जवाब: मुख्य चिंताएं डेटा सुरक्षा, चीनी तकनीक पर निर्भरता और घरेलू उद्योगों के हितों से जुड़ी हैं।

