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भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद नया मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट में पैर और जांघ में पांच गोलियां लगने का उल्लेख किया गया है, जबकि पुलिस की प्राथमिकी में आत्मरक्षा में चार राउंड फायरिंग का दावा किया गया है। इसी अंतर को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं। पुलिस का कहना है कि भरत भूषण तिवारी ने पहले पुलिस टीम पर फायरिंग की थी। इसके बाद एसटीएफ जवान ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। वहीं, मृतक के परिजनों का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है।
जांच एजेंसियां अब एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बैलिस्टिक जांच और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों का मिलान करेंगी। साथ ही यह भी जांच होगी कि पुलिस ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन किया या नहीं। राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए अगली सुनवाई 13 जुलाई तय की है। इस पूरे मामले में न्यायिक जांच अहम मानी जा रही है। जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पुलिस की कार्रवाई परिस्थितियों के अनुरूप थी या नहीं। फिलहाल भरत तिवारी एनकाउंटर मामला बिहार की चर्चित घटनाओं में शामिल हो गया है और सभी की नजर जांच के नतीजों पर टिकी है।
FAQ
प्रश्न 1: भरत तिवारी एनकाउंटर कब हुआ था?
उत्तर: यह घटना 17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में हुई थी।
प्रश्न 2: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?
उत्तर: रिपोर्ट के अनुसार पैर और जांघ में पांच गोलियां लगने का उल्लेख किया गया है।
प्रश्न 3: पुलिस क्या दावा कर रही है?
उत्तर: पुलिस का कहना है कि आरोपी ने पहले फायरिंग की थी, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई।
प्रश्न 4: अगली सुनवाई कब होगी?
उत्तर: राज्य मानवाधिकार आयोग ने अगली सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित की है।