भारत को सुपरकंप्यूटिंग में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मजबूत कदम: राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन

नई दिल्ली: भारत सरकार द्वारा 2015 में शुरू किया गया राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) देश को उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो रहा है। इस मिशन का उद्देश्य देश में सुपरकंप्यूटिंग सुविधाओं का विकास, वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना और शिक्षा, उद्योग व सरकारी क्षेत्रों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है।

20 पेटाफ्लॉप्स तक की क्षमताएं विकसित

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, NSM के तहत देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में सुपरकंप्यूटरों की संख्या में इजाफा किया गया है। अब तक 20 पेटाफ्लॉप्स से अधिक की कंप्यूटिंग क्षमता स्थापित की जा चुकी है। इस परियोजना पर 1,874 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का उपयोग किया गया है, जिसमें अनुसंधान, मानव संसाधन विकास और बुनियादी ढांचे का निर्माण शामिल है।

10,000 से अधिक शोधकर्ताओं को लाभ

सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत देशभर के 200 से अधिक संस्थानों और अनुसंधान प्रयोगशालाओं के 10,000 से ज्यादा शोधकर्ताओं को उन्नत कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच मिली है। इससे दवा अनुसंधान, जलवायु विज्ञान, आपदा प्रबंधन, खगोलशास्त्र और सामग्री विज्ञान जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। अब तक 1 करोड़ से अधिक गणनात्मक कार्य और 1,500 से अधिक शोध प्रकाशन पूरे किए जा चुके हैं।

स्वदेशी नेटवर्क “त्रिनेत्र” और “रुद्र” सर्वर की सफलता

मिशन के तहत, स्वदेशी हाई-स्पीड नेटवर्क त्रिनेत्र और HPC सर्वर रुद्र का विकास भी किया गया है। त्रिनेत्र तीन चरणों में लागू किया जा रहा है, जिनमें 100 और 200 Gbps की डेटा ट्रांसफर क्षमता वाली प्रणालियां शामिल हैं। रुद्र सर्वर भारत में निर्मित पहला ऐसा सर्वर है जो विश्वस्तरीय HPC सर्वरों के समकक्ष है।

तीन ‘परम रुद्र’ सुपरकंप्यूटर राष्ट्र को समर्पित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2024 में तीन परम रुद्र सुपरकंप्यूटर देश के युवा वैज्ञानिकों को समर्पित किए। इन्हें पुणे, दिल्ली और कोलकाता में स्थापित किया गया है। ये मशीनें भौतिकी, खगोलशास्त्र और पृथ्वी विज्ञान जैसे क्षेत्रों में उन्नत अनुसंधान को गति देने का कार्य कर रही हैं।

तीन चरणों में विकसित हो रहा है मिशन

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन तीन चरणों में आगे बढ़ रहा है:

  • चरण 1: शुरुआती छह सुपरकंप्यूटरों की स्थापना और प्रणाली निर्माण।
  • चरण 2: सिस्टम के अधिक हिस्सों का स्वदेशीकरण और सॉफ्टवेयर स्टैक का विकास।
  • चरण 3: पूर्ण स्वदेशी सुपरकंप्यूटिंग पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण।

यह मिशन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जा रहा है।

सेमीकंडक्टर मिशन से मिलेगी और ताकत

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन भी NSM को सहयोग देने के लिए तैयार है, जिससे सुपरकंप्यूटरों के लिए जरूरी प्रोसेसर और अन्य घटकों का घरेलू उत्पादन बढ़ सकेगा।

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