नई दिल्ली, 6 नवंबर 2026। विश्वविद्यालय भेदभाव नियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सभी वर्गों के विद्यार्थियों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया गया। अदालत में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए समानता नियमों और शिकायत निवारण व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
विश्वविद्यालय भेदभाव नियम पर केंद्र सरकार का रुख
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने संकेत दिया कि विवादित नियमों की समीक्षा के लिए समिति गठित करने पर विचार किया जा सकता है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में निष्पक्ष और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने विद्यार्थियों के बीच समानता बनाए रखने और किसी भी वर्ग के साथ अनुचित व्यवहार रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया।
UGC के नए नियमों पर विवाद क्यों?
UGC ने जनवरी 2026 में उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए नए नियम अधिसूचित किए थे। हालांकि, कुछ प्रावधानों को लेकर आपत्तियां सामने आईं।
याचिकाकर्ताओं ने शिकायत निवारण व्यवस्था और विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों को मिलने वाली सुरक्षा पर सवाल उठाए।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों के अमल पर अंतरिम रोक लगा दी।
फिलहाल संबंधित पुराने नियम लागू हैं।
मामले में आगे की सुनवाई और सरकार के निर्णय पर विद्यार्थियों तथा विश्वविद्यालय प्रशासन की नजर रहेगी।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. विश्वविद्यालय भेदभाव नियम का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: विद्यार्थियों को भेदभाव से बचाना और उच्च शिक्षण संस्थानों में समान अवसर सुनिश्चित करना।
प्रश्न 2. क्या UGC के नए नियम लागू हैं?
उत्तर: जनवरी 2026 के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई है।
प्रश्न 3. केंद्र सरकार क्या कदम उठा सकती है?
उत्तर: सरकार विवादित प्रावधानों की समीक्षा के लिए समिति गठित करने पर विचार कर सकती है।

