नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल निर्यात शुल्क शून्य करने का फैसला किया है। वहीं, डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर शुल्क बढ़ाने की खबर सामने आई है। इस बदलाव का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की परिस्थितियों के अनुसार कर व्यवस्था में संतुलन बनाना बताया जा रहा है।
नई दरों के अनुसार, पेट्रोल पर निर्यात शुल्क 2.50 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य किया गया है। दूसरी ओर, डीजल पर शुल्क 8.50 रुपये से बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 10.50 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर किया गया है।
निर्यात शुल्क घटने से कंपनियों को क्या फायदा?
शुल्क समाप्त होने से विदेशों में पेट्रोल बेचने वाली भारतीय रिफाइनरी कंपनियों की लागत कम हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है।
हालांकि, डीजल और विमान ईंधन पर शुल्क बढ़ने से संबंधित उत्पादों के निर्यात का मुनाफा प्रभावित हो सकता है।
क्या आम लोगों को सस्ता पेट्रोल मिलेगा?
शुल्क में कटौती का घरेलू पेट्रोल की कीमतों से सीधा संबंध नहीं है।
पेट्रोल पंपों पर कीमतें कच्चे तेल की लागत, कर और तेल कंपनियों के मूल्य निर्धारण पर निर्भर करती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: पेट्रोल पर नया निर्यात शुल्क कितना है?
उत्तर: नई दर के अनुसार पेट्रोल पर निर्यात शुल्क शून्य है।
प्रश्न 2: डीजल पर कितना शुल्क बढ़ा है?
उत्तर: डीजल निर्यात शुल्क में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी बताई गई है।
प्रश्न 3: क्या पेट्रोल की घरेलू कीमतें घटेंगी?
उत्तर: इस फैसले से घरेलू पेट्रोल की कीमतों में तत्काल कमी जरूरी नहीं है।

