पराली जलाने पर सख्ती और खेतों में आग की निगरानीकेंद्र सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए दोपहर 3 बजे के बाद निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया।

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026। उत्तर भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए केंद्र सरकार ने पराली जलाने पर सख्ती बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। विशेष रूप से दोपहर 3 बजे के बाद खेतों में आग लगाने की घटनाओं पर निगरानी मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य प्रदूषण को नियंत्रित करना और पराली जलाने की घटनाओं को रोकना है।

पराली जलाने पर सख्ती, राज्यों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश

केंद्र सरकार ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित संबंधित राज्यों को निगरानी व्यवस्था मजबूत करने को कहा है। स्थानीय प्रशासन को खेतों में आग लगने की घटनाओं की पहचान कर समय पर कार्रवाई करने पर ध्यान देना होगा।

कुछ रिपोर्टों में आशंका जताई गई है कि सैटेलाइट निगरानी से बचने के लिए शाम के समय पराली जलाई जाती है। इसलिए जमीनी निरीक्षण और तकनीकी निगरानी दोनों महत्वपूर्ण हैं।

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की चिंता

सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका रहती है। वाहनों, उद्योगों और निर्माण गतिविधियों के अलावा पराली का धुआं भी प्रदूषण में योगदान दे सकता है।

सरकार किसानों को हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसी मशीनों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

इससे फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन संभव है।

FAQ: महत्वपूर्ण सवाल

प्रश्न 1: पराली जलाने पर सख्ती क्यों बढ़ाई गई है?

उत्तर: वायु प्रदूषण कम करने और खेतों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए।

प्रश्न 2: निगरानी कब बढ़ाने पर जोर दिया गया है?

उत्तर: विशेष रूप से दोपहर 3 बजे के बाद।

प्रश्न 3: किसान पराली का प्रबंधन कैसे कर सकते हैं?

उत्तर: कृषि मशीनों, जैविक खाद और बायोमास आधारित विकल्पों से।

DEVIDAS | VISHWAS PRAKASH

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