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“जातीय भेदभाव रोकथाम और दिव्यांग संरक्षण पर समीक्षा बैठक, त्वरित राहत और विधिक संरक्षण के निर्देश“
जिले में जातीय भेदभाव रोकने और दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गुरुवार को अतिरिक्त उपायुक्त महेन्द्र पाल गुर्जर ने दो महत्वपूर्ण समितियों की बैठकें आयोजित कीं। उन्होंने एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 और राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 के तहत चल रही कार्रवाइयों की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई और परस्पर समन्वय के निर्देश दिए।
पहली बैठक जिला सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की थी, जिसमें बताया गया कि 31 अगस्त 2025 तक जिले में कुल 67 मामले दर्ज हैं। इनमें से 52 मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं, 4 मामलों में निर्णय आ चुका है, 4 मामलों में धारा खारिज की गई है और 7 मामलों में जांच जारी है। अधिनियम के तहत पीड़ितों को कानूनी संरक्षण और पुनर्वास के लिए ₹1 लाख से ₹8.25 लाख तक की राहत राशि दी जाती है, जो चरणबद्ध तरीके से एफआईआर दर्ज होने, मामला न्यायालय में प्रस्तुत होने और निर्णय आने पर प्रदान की जाती है।
दूसरी बैठक राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के अंतर्गत गठित जिला स्तरीय समिति की थी, जिसमें ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक मंदता और बहु-दिव्यांगता से पीड़ित व्यक्तियों के विधिक संरक्षण पर चर्चा हुई। अब तक जिले में 113 स्थायी विधिक संरक्षक नियुक्त किए जा चुके हैं।
अतिरिक्त उपायुक्त ने अधिकारियों से कहा कि दोनों अधिनियमों के प्रावधानों का गंभीरता से पालन किया जाए ताकि पीड़ितों और दिव्यांगजनों को समय पर राहत और विधिक संरक्षण मिल सके। बैठकों में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र शर्मा, उप-पुलिस अधीक्षक डॉ. वसुधा सूद, जिला कल्याण अधिकारी आवास पंडित सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।