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जन धन योजना ने रचा इतिहास, गरीबों के बैंक खाते 55 करोड़ के पार

जन धन योजना ने पार किया 55 करोड़ खातों का आंकड़ा, वित्तीय समावेशन की दिशा में बड़ा कदम

प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) ने देश में वित्तीय समावेशन को एक नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बताया कि इस योजना के तहत अब तक 55 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें से अधिकांश उन लोगों के हैं जो कभी बैंकिंग प्रणाली से जुड़े नहीं थे।

केवाईसी अपडेट अभियान शुरू
वित्त मंत्री ने बताया कि 1 जुलाई 2025 से देशभर में केवाईसी अपडेट के लिए विशेष शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। अब तक एक लाख ग्राम पंचायतों में यह अभियान पहुंच चुका है। उन्होंने सभी खाताधारकों से इन शिविरों में भाग लेने और अपनी जानकारी अपडेट करवाने की अपील की।

महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों की भागीदारी उल्लेखनीय
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, इन खातों में 56% महिला खाताधारक हैं और अब तक खातों में कुल जमा राशि 2.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो चुकी है। लगभग 66.6% खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं, जो योजना की जमीनी पहुंच को दर्शाता है।

वित्तीय समावेशन की वैश्विक मिसाल
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एम. राजेश्वर राव के अनुसार, जन धन योजना भारत में वित्तीय समावेशन का सबसे बड़ा कदम साबित हुआ है। यह दुनिया का सबसे बड़ा वित्तीय समावेशन कार्यक्रम बन गया है। वित्त मंत्री ने भी इसे वैश्विक स्तर की सबसे व्यापक वित्तीय पहुंच वाली योजनाओं में से एक बताया।

खातों में बढ़ा औसत संतुलन
मार्च 2015 में जहां प्रति खाता औसत बैलेंस 1,065 रुपए था, वह अब बढ़कर 4,352 रुपए तक पहुंच गया है। वर्तमान में लगभग 80% खाते सक्रिय हैं, जो इसकी उपयोगिता और प्रासंगिकता को दर्शाता है।

सरकारी योजनाओं से सीधे लाभ
जन धन योजना के माध्यम से लाभार्थियों को मनरेगा की मजदूरी, उज्ज्वला योजना की सब्सिडी, और कोविड राहत फंड जैसी कई सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके खातों में मिल रहा है।

बैंकिंग टचपॉइंट्स से बढ़ी पहुंच
आज देश के 99.95% आबादी वाले गांवों में बैंकिंग सेवाएं 5 किलोमीटर के दायरे में उपलब्ध हैं, जिससे वित्तीय सेवाओं की व्यापक पहुंच सुनिश्चित हो पाई है।

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