बीकानेर में निःशुल्क ‘एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी सेंटर : जहां नशे से लड़ने को मिल रही है दवा, परामर्श और विश्वास
“बीकानेर में निःशुल्क ‘एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी सेंटर’: जहां नशे से लड़ने को मिल रही है दवा, परामर्श और विश्वास”
नशे की गिरफ्त में फंसे युवाओं और वयस्कों को नई राह दिखाने वाला एक निःशुल्क एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (ATF) सेंटर बीकानेर में पिछले सात महीनों से सक्रिय है। यह केंद्र भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की एक प्रमुख पहल का हिस्सा है, जिसका संचालन और पर्यवेक्षण एम्स नई दिल्ली के निर्देशन में किया जा रहा है।
राजस्थान में इस योजना के अंतर्गत बीकानेर के अलावा पाली, जोधपुर और अजमेर में भी ऐसे ही यूनिट्स कार्यरत हैं। बीकानेर यूनिट में दो मेडिकल ऑफिसर, दो काउंसलर और पांच प्रशिक्षित नर्सिंग ऑफिसर कार्यरत हैं, जिन्हें एम्स द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
डॉ. श्री गोपाल, जो इस यूनिट के नोडल अधिकारी हैं, के अनुसार यह केंद्र अब तक सैकड़ों रोगियों को निःशुल्क उपचार और काउंसलिंग सेवाएं दे चुका है। यहां पर स्मैक, डोडा, अफीम जैसे मादक पदार्थों की लत से पीड़ित मरीजों को बाजार में महंगी मिलने वाली दवाएं मुफ्त में दी जाती हैं। इन दवाओं को सुरक्षित सेफ लाइन में रखा जाता है और मरीजों को निगरानी में दवाई दी जाती है।
डॉ. गोपाल ने बताया कि मरीजों की ऑनलाइन और ऑफलाइन मेडिकल हिस्ट्री दर्ज कर एम्स दिल्ली को भेजी जाती है, जिससे मरीज की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सके।
केवल दवाइयां ही नहीं, यहां मरीजों को मानसिक और व्यवहारिक परामर्श (काउंसलिंग) भी दी जाती है। नीलिमा सोलंकी, जो इस केंद्र की काउंसलर हैं, ने बताया कि कई युवा ऐसे भी आते हैं जो मोबाइल की लत, अवसाद और तनाव से जूझ रहे होते हैं। ऐसे मामलों में गहन काउंसलिंग द्वारा उन्हें उबरने में मदद दी जाती है।
यहां भर्ती मरीजों को मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत अतिरिक्त लाभ भी दिए जाते हैं, जिससे इलाज के दौरान उनका आर्थिक बोझ कम होता है।
लाभार्थियों का अनुभव:
यहां उपचार ले रहे कई लाभार्थियों ने बताया कि इस केंद्र में आकर उन्हें नया जीवन मिला है। एक लाभार्थी ने कहा, “पहले मैं नशे की गिरफ्त में था, लेकिन यहां इलाज और काउंसलिंग से अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।”
दूसरे ने कहा, “इस सेंटर ने हमें न केवल दवा दी, बल्कि आत्मविश्वास भी लौटाया।”
