हाईवे पर आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए NHAI की बड़ी पहल: पशु-आश्रय स्थलों का होगा निर्माण

राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने और उनकी देखभाल सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक पायलट परियोजना शुरू की है। इसके तहत, NHAI ने मवेशी आश्रय स्थलों के निर्माण और रखरखाव के लिए मेसर्स गवर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

हाईवे किनारे पशु-आश्रय स्थलों का निर्माण

इस परियोजना के तहत 0.21 से 2.29 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले आश्रय स्थलों को आवारा पशुओं के लिए सुरक्षित स्थान के रूप में विकसित किया जाएगा। इन आश्रय स्थलों पर पशुओं को प्राथमिक चिकित्सा, चारा, पानी और देखभाल की सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। एनएचएआई इन आश्रयों का निर्माण और रखरखाव अपनी भूमि पर करेगा, जिससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की संख्या को नियंत्रित किया जा सकेगा।

इन राष्ट्रीय राजमार्गों पर होगी पहल

यह योजना एनएच-334बी (उत्तर प्रदेश-हरियाणा सीमा से रोहना खंड), एनएच-148बी (भिवानी-हांसी सेक्शन), एनएच-21 (कीरतपुर-नेरचौक सेक्शन), और एनएच-112 (जोधपुर रिंग रोड के डांगियावास से जाजीवाल सेक्शन) सहित कई अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू की जाएगी।

पशुओं से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान

एनएचएआई के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव ने इस पहल को सड़क सुरक्षा और मानवीय देखभाल का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल यात्रियों के लिए सुरक्षित राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह आवारा पशुओं की देखभाल की आवश्यकता को भी पूरा करती है।

भागीदारी और समर्थन

राष्ट्रीय राजमार्ग बिल्डर्स फेडरेशन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र अग्रवाल ने एनएचएआई के इस कदम का स्वागत किया और इसे सड़क सुरक्षा और पशुओं की देखभाल के लिए एक प्रेरणादायक पहल बताया।

गवर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के निदेशक रविंदर गवर ने इस परियोजना में एनएचएआई के साथ साझेदारी पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी सीएसआर फंड के तहत घायल पशुओं के परिवहन और उपचार के लिए मवेशी एम्बुलेंस और प्राथमिक चिकित्सा केंद्र स्थापित करेगी।

व्यापक उपाय

इस पहल के तहत, मवेशी एम्बुलेंस के अलावा, प्रत्येक 50 किलोमीटर पर प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और अस्पताल बनाए जाएंगे। साथ ही, आवारा पशुओं को सुरक्षित परिवहन, चारा उपलब्धता, और मवेशी अतिचार अधिनियम, 1871 के प्रावधानों को लागू किया जाएगा।

यह पहल न केवल सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में मदद करेगी बल्कि पशु कल्याण के क्षेत्र में भी एक मिसाल पेश करेगी। NHAI की यह पहल देश में सड़क सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

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