अतुल सुभाष मामला – सजा या राहत? वरिष्ठ अधिवक्ता शिवबचन सरोज की राय

“498ए का दुरुपयोग – पुरुषों के अधिकार और वरिष्ठ अधिवक्ता शिवबचन सरोज की राय”

वरिष्ठ अधिवक्ता शिवबचन सरोज का कहना है कि शादी के बाद घरेलू हिंसा के मामलों में पुरुषों के पास अधिकार न के बराबर हैं। उनके पास केवल तलाक का अधिकार है, लेकिन घरेलू हिंसा होने पर वह लड़की के खिलाफ किसी प्रकार का मामला दर्ज नहीं करा सकते।

कानून का दुरुपयोग हो रहा है

शिवबचन सरोज के अनुसार, जब भारतीय कानून में बदलाव के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू हुई थी, तब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 498ए धारा में संशोधन करने की सिफारिश की थी। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि इस धारा का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है।

हालांकि, केंद्र सरकार ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, और आज भी महिलाएं इस कानून का गलत इस्तेमाल कर रही हैं। अधिवक्ता के मुताबिक, धारा 498ए के अंतर्गत यदि किसी महिला को उसके पति या ससुराल पक्ष द्वारा परेशान किया जाता है, तो दोषी को सात साल तक की सजा का प्रावधान है।

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