इजराइल और लेबनान के शिया संगठन हिजबुल्लाह के बीच दुश्मनी का इतिहास कई दशकों पुराना है, जिसका मूल कारण क्षेत्रीय राजनीति, संघर्ष और सुरक्षा के मुद्दे हैं। इस दुश्मनी के प्रमुख पहलुओं को समझना महत्वपूर्ण है।

इतिहास का संक्षिप्त विवरण

  1. 1970 और 1980 का दशक: इजराइल ने 1982 में लेबनान में एक सैन्य अभियान चलाया था, जिसका उद्देश्य आतंकवादी संगठनों, खासकर पीएलओ (प्लेस्टीनियन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन) को समाप्त करना था। इस दौरान इजराइल ने बेरुत तक अपनी सेनाएं बढ़ाईं।
  2. हिजबुल्लाह का उदय: इस सैन्य कार्रवाई के बाद, हिजबुल्लाह ने इजराइल के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई और धीरे-धीरे एक प्रमुख सशस्त्र समूह बन गया। हिजबुल्लाह ने इजराइली सैनिकों के खिलाफ ग guerrilla युद्ध छेड़ा, जिससे इजराइल की स्थिति कमजोर हुई।

2000 में इजराइल की वापसी

इजराइल ने 2000 में लेबनान से अपनी सेनाएं वापस खींच लीं, लेकिन हिजबुल्लाह ने इस कदम को अपनी जीत के रूप में पेश किया। यह वापसी इजराइल के लिए एक रणनीतिक हार के रूप में देखी गई, जिससे हिजबुल्लाह की शक्ति और प्रभाव बढ़ा।

हालिया तनाव

हाल के वर्षों में, इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव बढ़ता रहा है। इजराइल ने हिजबुल्लाह के मिसाइल कार्यक्रम और ईरानी समर्थन को लेकर चिंता जताई है। इस बीच, हिजबुल्लाह ने इजराइल के खिलाफ कई बार सैन्य कार्रवाई की है, जिसमें रॉकेट हमले शामिल हैं।

वर्तमान स्थिति

इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष अब भी जारी है, और दोनों पक्षों के बीच किसी भी समय टकराव की संभावना बनी रहती है। यह दुश्मनी न केवल इजराइल और लेबनान, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता पर असर डालती है।

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