“विजयादशमी: बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व“

विजयादशमी का पर्व पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है, जहाँ जगह-जगह रावण और मेघनाद के पुतले जलाए जा रहे हैं। लेकिन जालौन के कोंच नगर में इस पर्व का एक अनोखा और दिलचस्प तरीका है। यहाँ के कारीगरों द्वारा रावण और मेघनाद के 40-40 फुट ऊँचे पुतले बड़े-बड़े पहियों वाले रथ में रखकर जलाए जाते हैं।

इस परंपरा के दौरान जब राम और रावण का युद्ध होता है, तो ये पुतले रस्सियों की सहायता से पूरे मैदान में दौड़ाए जाते हैं। इस अनोखी गतिविधि में, पुतले कई बार जमीन पर गिरते हैं, लेकिन स्थानीय लोग उन्हें फिर से खड़ा कर मैदान में दौड़ाते हैं।

इस परंपरा का एक गहरा संदेश है: बुराई चाहे जितनी भी भागे, उसका अंत निश्चित है। यह दर्शाता है कि अच्छाई की विजय हमेशा सुनिश्चित होती है, भले ही वह संघर्ष कितना भी कठिन क्यों न हो। कोंच की यह अनोखी परंपरा न केवल सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, बल्कि समाज को एक महत्वपूर्ण सीख भी देती है।

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