इजरायल और फिलिस्तीनी संगठनों जैसे हमास और हिज्बुल्ला के बीच बढ़ते संघर्षों के बावजूद भारत का रुख इन संगठनों के प्रति नरम बना हुआ है। इजरायल, जो कि भारत का एक घनिष्ठ मित्र और महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है, लगातार हमास और हिज्बुल्ला के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता रहा है। इसके बावजूद, भारत ने हमेशा से संतुलित और कूटनीतिक दृष्टिकोण अपनाया है। आखिर क्यों भारत इन संगठनों के प्रति अपने रुख में नरमी बरतता है, इस पर कई विशेषज्ञों की राय महत्वपूर्ण है।

भारत की विदेश नीति: संतुलन और कूटनीति

भारत की विदेश नीति का सबसे बड़ा सिद्धांत संतुलन और कूटनीति है। भारत हमेशा से ही मध्य-पूर्व में एक संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता है, ताकि वह क्षेत्रीय संघर्षों में सीधे हस्तक्षेप से बच सके। विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की यह नीति उसकी अपनी आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक हितों से जुड़ी हुई है। भारत के मध्य-पूर्व के देशों के साथ घनिष्ठ व्यापारिक और तेल आपूर्ति के रिश्ते हैं, खासकर ईरान, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के साथ।

मुस्लिम देशों के साथ संबंध:

भारत में एक बड़ी मुस्लिम आबादी है, और देश की आंतरिक शांति बनाए रखने के लिए मुस्लिम देशों के साथ मधुर संबंध बनाए रखना बेहद जरूरी है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर भारत हमास और हिज्बुल्ला के खिलाफ खुलकर इजरायल का समर्थन करता है, तो इससे मुस्लिम देशों के साथ उसके संबंध प्रभावित हो सकते हैं। विशेषकर फिलिस्तीनी मुद्दे पर भारत हमेशा से फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करता आया है, जो अरब और इस्लामी दुनिया में भारत की साख को मजबूत करता है।

ऐतिहासिक दृष्टिकोण:

भारत का हमास और हिज्बुल्ला के प्रति नरम रुख उसके ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी जुड़ा हुआ है। भारत लंबे समय से फिलिस्तीनी मुद्दे का समर्थन करता आया है, खासकर महात्मा गांधी और नेहरू के समय से। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भारत ने हमेशा से ही इजरायल के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को विकसित करने के बावजूद फिलिस्तीन के लोगों के अधिकारों का समर्थन किया है। भारत की यह नीति उसे वैश्विक मंच पर एक संतुलित और निष्पक्ष राष्ट्र के रूप में स्थापित करती है।

आतंरिक सुरक्षा और आतंकवाद:

भारत खुद लंबे समय से आतंकवाद से जूझ रहा है, खासकर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी गतिविधियों के रूप में। हालांकि हमास और हिज्बुल्ला का आतंकवाद का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन भारत इन संगठनों को उसी तरह से नहीं देखता जैसा कि वह दक्षिण एशियाई आतंकवादी संगठनों को देखता है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत हमास और हिज्बुल्ला को एक स्थानीय संघर्ष का हिस्सा मानता है, जो कि फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष से जुड़ा है, और उसे सीधे तौर पर भारत की सुरक्षा पर खतरे के रूप में नहीं देखता।

इजरायल के साथ गहरे संबंध:

हालांकि, भारत और इजरायल के बीच घनिष्ठ संबंध हैं, खासकर रक्षा, कृषि, और साइबर सुरक्षा के क्षेत्रों में। भारत इजरायल के साथ गहरे रणनीतिक साझेदार के रूप में काम करता है, लेकिन उसने हमेशा अपनी विदेश नीति में एक संतुलन बनाए रखा है। इजरायल के साथ बढ़ते रक्षा और तकनीकी सहयोग के बावजूद भारत ने फिलिस्तीन के मुद्दे पर अपनी स्वतंत्र कूटनीति बनाए रखी है।

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