कह के रहेंगे – कांग्रेस कब से अंबेडकर परस्त हो गई?
“भाजपा के डीएनए में प्रारंभ से ही “दलित विमर्श” रहा है“
भाजपा के डीएनए में “दलित विमर्श” का समावेश इसकी मातृ संस्था आरएसएस के “सामाजिक समरसता” के सिद्धांतों से हुआ है। इसी का परिणाम है कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद बाबा साहेब अंबेडकर को ‘भारत रत्न’ का सम्मान प्राप्त हो सका।
कांग्रेस ने अपने शासनकाल में नेहरू और इंदिरा गांधी को भारत रत्न से सम्मानित किया, लेकिन अंबेडकर जी को इस सम्मान से वंचित रखा। वहीं, संघ के प्रातः स्मरण मंत्र में अंबेडकर जी, संत पेरियार, महात्मा फुले और नारायण स्वामी जैसे दलित महापुरुष शामिल हैं। आरएसएस और अंबेडकर जी के संबंध इतने गहरे थे कि वरिष्ठ प्रचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी उनके चुनाव में एजेंट रहे।
संघ के “दलित विमर्श” का प्रभाव इतना था कि भाजपा का जन्म मुंबई के “समता नगर” में हुआ। यह नाम भाजपा की विचारधारा का प्रतीक बना। दलित पैंथर मूवमेंट के नेता दत्ताराव सिंदे ने इसी विचारधारा से प्रेरित होकर भाजपा का हिस्सा बनने का निर्णय लिया।
अंबेडकर जी और कांग्रेस का विरोधाभास
गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में कहा कि अंबेडकर जी को नेहरू सरकार में अनुसूचित जाति और जनजातियों के प्रति गलत व्यवहार और अनुच्छेद 370 के कारण असंतोषवश कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा।
कांग्रेस ने अंबेडकर जी को संविधान सभा में प्रवेश से रोकने के लिए षड्यंत्र रचे। बंगाल की खुलना-जैसोर सीट से संविधान सभा में पहुंचे अंबेडकर जी की सदस्यता रद्द कराने के लिए कांग्रेस ने यह इलाका पाकिस्तान को सौंप दिया।
भाजपा की श्रद्धांजलि
भाजपा ने अंबेडकर जी के सम्मान में उनके जीवन से जुड़े पाँच स्थानों को “पंचतीर्थ” के रूप में विकसित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने चैत्य भूमि और लंदन स्थित उनके निवास को स्मारक के रूप में परिवर्तित किया। दिल्ली के 26 अलीपुर रोड को भी भाजपा सरकार ने स्मारक के रूप में विकसित किया।
अंबेडकर जी के विचार और कांग्रेस का तुष्टिकरण
अंबेडकर जी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के खिलाफ थे। उनकी पुस्तक “थॉट्स ऑन पाकिस्तान” में उन्होंने लिखा कि धर्म आधारित विभाजन के बावजूद भारत सांप्रदायिक समस्याओं से मुक्त नहीं होगा। अंबेडकर जी के इन्हीं विचारों के कारण नेहरू और गांधी उन्हें राजनीतिक रूप से आगे नहीं बढ़ने देना चाहते थे।
दो बार मुंबई में अंबेडकर जी को चुनाव हराने के लिए नेहरू ने स्वयं प्रचार किया और अन्य दलों से सहयोग मांगा।
सम्मान बनाम फैशन
आज जो कांग्रेस और अन्य दल अंबेडकर जी का नाम लेते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि बाबा साहेब फैशन के नहीं, बल्कि सम्मान के विषय हैं। भाजपा ने अंबेडकर जी को सिर्फ स्मरण नहीं किया, बल्कि उनके विचारों और योगदान को सम्मानित करते हुए समाज में उनकी स्थायी विरासत को मजबूत किया।
