धरती के स्वर्ग’ पर तरक्की की रफ़्तार, मोदी की एक और ‘भीष्म प्रतिज्ञा’ पूरी
“जम्मू-कश्मीर की बदलती तस्वीर: विकास की नई इबारत, आतंक की जगह अब तरक्की की गूंज“
जहां एक ओर देश के कुछ हिस्सों में सिविल कानून को लेकर बहस और चिंता का माहौल है, वहीं दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्षों पहले ली गई प्रतिज्ञा — घाटी से आतंकवाद का अंत और वहां विकास की बहाली — अब हकीकत का रूप लेती नजर आ रही है।
लाल चौक से वंदे भारत तक: एक सपने की सच्चाई
1992 में नरेंद्र मोदी ने लाल चौक पर अनुच्छेद 370 को हटाने और कश्मीर को मुख्यधारा में लाने का संकल्प लिया था। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के बाद से, जम्मू-कश्मीर का चेहरा लगातार बदल रहा है। अब उस घाटी में, जहां कभी गोलियों की आवाजें आम थीं, वहां जल्द ही वंदे भारत ट्रेन की सीटी गूंजेगी।
श्रीनगर-कटरा वंदे भारत सेवा और उधमपुर-कटरा-बनहाल-श्रीनगर रेल लिंक जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट तैयार हो चुके हैं और जल्द ही इनका उद्घाटन होने की संभावना है। इससे जम्मू और कश्मीर की कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक सुधार होगा।
हर मौसम में कनेक्टिविटी: सुरंगों की रणनीतिक भूमिका
Z-Morh सुरंग
- लंबाई: 6.5 किलोमीटर
- उद्घाटन: जनवरी 2025
- सोनमर्ग को पूरे साल कनेक्ट करने वाली यह सुरंग पर्यटन और रणनीति दोनों लिहाज से अहम है।
ज़ोजी-ला सुरंग
- निर्माणाधीन सुरंग (14.2 किलोमीटर)
- एशिया की सबसे लंबी सड़क सुरंग बनने की ओर
- कश्मीर को लद्दाख से जोड़ेगी, और ज़ोजीला दर्रे पर निर्भरता खत्म होगी।
दुनिया के सबसे ऊंचे पुल और नई रेल लाइनों से बदल रही घाटी
चिनाब रेल पुल
- एफिल टॉवर से भी ऊंचा
- दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल
- उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (USBRL) का हिस्सा
अंजी खाद पुल
- भारत का पहला केबल-स्टेड रेलवे पुल
- कटरा और रियासी के बीच मजबूत संपर्क स्थापित करता है
ये परियोजनाएं सिर्फ कनेक्टिविटी नहीं, बल्कि भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी हैं।
ऊर्जा से रोशन हो रही घाटी
किशनगंगा जलविद्युत परियोजना
- क्षमता: 330 मेगावाट
- उद्घाटन: मई 2018
- घाटी के कई इलाकों में बिजली पहुंचा रही है
बगलीहार बांध परियोजना (द्वितीय चरण)
- 450 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता
- क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत किया गया
नाउम्मीदी से उम्मीद की ओर
धारा 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में न केवल सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि बुनियादी ढांचे, पर्यटन, ऊर्जा और परिवहन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय विकास हुआ है। अब घाटी केवल सुरक्षा मुद्दों के लिए नहीं, बल्कि आर्थिक विकास और पर्यटक आकर्षण के लिए चर्चा में है।
