RBI ने लगातार 10वीं बार ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया: लोन महंगे नहीं होंगे, EMI भी स्थिर रहेगी, रेपो रेट 6.5% पर बरकरार
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा में लगातार 10वीं बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे आम जनता के लिए राहत की खबर है, क्योंकि इसका मतलब है कि लोन महंगे नहीं होंगे और EMI में भी कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। RBI ने रेपो रेट को 6.5% पर बरकरार रखा है, जो पिछले कुछ महीनों से इसी स्तर पर बना हुआ है।
रेपो रेट का असर
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर केंद्रीय बैंक (RBI) देश के वाणिज्यिक बैंकों को उधार देता है। जब रेपो रेट में बढ़ोतरी होती है, तो बैंकों के लिए उधारी महंगी हो जाती है, जिससे वे अपने ग्राहकों को दिए जाने वाले लोन पर ब्याज दरें बढ़ा देते हैं। इससे लोन महंगे हो जाते हैं और EMI भी बढ़ जाती है। लेकिन इस बार रेपो रेट को स्थिर रखने से उधारकर्ताओं के लिए राहत बनी रहेगी।
घर, कार और पर्सनल लोन की EMI नहीं बढ़ेगी
RBI के इस फैसले से उन लोगों को खासतौर पर फायदा होगा, जिन्होंने होम लोन, ऑटो लोन, या पर्सनल लोन लिया हुआ है। रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने का मतलब है कि इन लोन की ब्याज दरें भी फिलहाल स्थिर रहेंगी, जिससे EMI में कोई वृद्धि नहीं होगी। इससे लोन लेने वालों को राहत मिलेगी, जो पहले से ही बढ़ती महंगाई और अन्य खर्चों से जूझ रहे हैं।
महंगाई पर RBI की नजर
हालांकि, RBI ने महंगाई को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है। केंद्रीय बैंक ने यह संकेत दिया कि आने वाले समय में महंगाई को नियंत्रित रखना उसकी प्राथमिकता रहेगी। मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने कहा कि वैश्विक और घरेलू कारणों से महंगाई का दबाव बना हुआ है, लेकिन फिलहाल ब्याज दरों में स्थिरता बनाए रखना जरूरी है ताकि आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिल सके।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
RBI का यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है। रेपो रेट को स्थिर रखने से न केवल लोन लेने वाले लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि इससे बाजार में निवेश और उपभोग बढ़ने की संभावना भी है। इसका सकारात्मक असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है, खासकर उस समय जब वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना किया जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि RBI का यह फैसला सही समय पर लिया गया है, क्योंकि इससे लोगों की क्रय शक्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। विशेषज्ञों ने कहा कि ब्याज दरों में स्थिरता से निवेश में वृद्धि होगी और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। साथ ही, इस फैसले से मौद्रिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।