लोकसभा में प्रियंका गांधी का पहला भाषण: भय के माहौल और आरक्षण पर सरकार को घेरा
“लोकसभा में अपने पहले भाषण में प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए”
कहा कि भय फैलाने वाले लोग खुद भय में जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा डर का माहौल अंग्रेजों के शासनकाल में भी नहीं था। देश को भय के बजाय साहस और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।
शासकों की जनता से दूरी पर सवाल
प्रियंका गांधी ने कहा कि पहले के राजा भेष बदलकर जनता के बीच जाते थे, लेकिन आज के शासक केवल भेष बदलते हैं, पर जनता के बीच जाने से डरते हैं। उन्होंने सरकार पर सदन में चर्चा से बचने और आलोचना से डरने का आरोप लगाया।
जातिगत जनगणना की जरूरत
जातिगत जनगणना की वकालत करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि इससे समाज की वास्तविक स्थिति का आंकलन किया जा सकेगा और उसी के आधार पर नीतियां बनाई जा सकेंगी। उन्होंने कहा कि यह जनता की मांग है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
संविधान को बताया सुरक्षा कवच
उन्होंने संविधान को देश के नागरिकों का सुरक्षा कवच बताते हुए कहा कि यह न्याय, एकता और अभिव्यक्ति की आजादी की गारंटी देता है। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि पिछले 10 सालों में इस सुरक्षा कवच को कमजोर करने के प्रयास हुए हैं।
आरक्षण और निजीकरण पर हमला
आरक्षण व्यवस्था पर चर्चा करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार लेटरल एंट्री और निजीकरण के माध्यम से आरक्षण को कमजोर कर रही है।
संवेदनशील घटनाओं का उल्लेख
प्रियंका गांधी ने हाथरस, मणिपुर और उन्नाव जैसी घटनाओं पर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संविधान ने हर भारतीय को न्याय के लिए संघर्ष करने और आवाज उठाने का साहस दिया है।
बैलेट पेपर से चुनाव की मांग
चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए प्रियंका गांधी ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और जनता का विश्वास बहाल होगा।
संविधान की रक्षा का आह्वान
प्रियंका गांधी ने कहा कि हमारा संविधान उम्मीद, न्याय और अभिव्यक्ति की वह ज्योति है, जो हर भारतीय को शक्ति देती है। उन्होंने देशवासियों से संविधान की रक्षा करने का आह्वान किया।
