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पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा से बढ़ेगी रक्षा ताकत: सेना प्रमुख

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा का स्वागत किया, कहा – यह रक्षा बलों की क्षमता बढ़ाने में सहायक होगी

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा का स्वागत किया और इसे भारत के रक्षा बलों की क्षमता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगी तथा आधुनिक सैन्य तकनीकों और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने में सहायक होगी।

यात्रा का रक्षा क्षेत्र पर प्रभाव

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण समझौतों पर चर्चा हुई। इन समझौतों का उद्देश्य सैन्य उपकरणों, उन्नत रक्षा तकनीकों और सैन्य प्रशिक्षण में सहयोग को और अधिक गहरा करना है।

मुख्य बिंदु:

  1. संयुक्त सैन्य सहयोग – भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में संयुक्त अभ्यास और सैन्य प्रशिक्षण को बढ़ाने पर चर्चा हुई।
  2. आधुनिक रक्षा तकनीक का हस्तांतरण – अमेरिका से अत्याधुनिक हथियार प्रणाली, ड्रोन तकनीक, साइबर सुरक्षा और रक्षा निर्माण में सहयोग को गति मिलेगी।
  3. स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा – भारत के रक्षा उद्योग को मजबूती देने के लिए मेक इन इंडिया पहल के तहत अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों के उत्पादन में सहयोग की संभावनाएं बनीं।
  4. रणनीतिक साझेदारी – दोनों देशों के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।

सेना प्रमुख का बयान

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत के रक्षा बलों के लिए एक बड़ा अवसर है। अमेरिका के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग हमारी सैन्य क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। अत्याधुनिक तकनीकों के आदान-प्रदान से हमारे जवानों को वैश्विक स्तर की विशेषज्ञता मिलेगी।”

भविष्य की संभावनाएं

विशेषज्ञों के अनुसार, इस यात्रा के बाद भारत और अमेरिका के बीच रक्षा उपकरण निर्माण, उन्नत सैन्य तकनीक और अंतरिक्ष सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा मिलेगी। इससे भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और भारतीय सेना की ताकत को और अधिक मजबूती मिलेगी।

यह यात्रा दोनों देशों के रक्षा संबंधों को और गहरा करने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी, जिससे भारत की रणनीतिक शक्ति और सुरक्षा क्षमताओं में वृद्धि होगी।

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