जिलाधिकारी की अध्यक्षता में पेंशनर्स दिवस का आयोजन
“जिलाधिकारी की अध्यक्षता में पेंशनर्स दिवस का आयोजन संपन्न”
कार्यक्रम का शुभारम्भ जिलाधिकारी ने 105 वर्षीय पेंशनर गोपीनाथ पाल, जो पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हुए हैं, को माला पहनाकर, पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और कंबल भेंट कर सम्मानित करके किया। इसके साथ ही 80 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनर्स – राजदेव यादव, राम प्रज्वलित सिंह, बाबूराम सिंह, अवध नारायण सिंह, उमाशंकर मिश्र, महावल यादव, लक्ष्मी नारायण पाण्डेय, राम प्रसाद, नियादिर अली, हीरालाल पाण्डेय, यदुनाथ सिंह, कवलदेई देवी, कालिका प्रसाद यादव, भगवान सिंह, उद्यव तिवारी और सत्यदेव सिंह को अंगवस्त्र एवं कंबल भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में गवर्नमेंट पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव, पुलिस पेंशनर्स कल्याण संस्थान के अध्यक्ष उमाशंकर मिश्र, सेवानिवृत्त उप पुलिस अधीक्षक अशोक सिंह, पेंशनर्स संघ बेसिक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष सत्यदेव सिंह, सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सी.बी. सिंह, जिला मंत्री राजबली यादव, और राज्य विद्युत परिषद पेंशनर्स संघ के अध्यक्ष बलिभद्र मिश्र सहित अन्य पेंशनर्स को भी सम्मानित किया गया।
वरिष्ठ कोषाधिकारी ने पेंशन वितरण, पेंशन पुनरीक्षण, दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस चिकित्सा योजना, और 80 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों के लिए अतिरिक्त पेंशन पर जानकारी साझा की।
पेंशनर्स दिवस पर उपस्थित पेंशनर संगठनों के प्रतिनिधियों – उमाशंकर मिश्र, सी.बी. सिंह, राजबली यादव, बलिभद्र मिश्र और सत्यदेव सिंह ने पेंशनरों की समस्याओं और सुझावों पर अपने विचार व्यक्त किए।
वरिष्ठ कोषाधिकारी ने आश्वस्त किया कि पेंशनरों की उचित मांगों और सुझावों का समाधान प्राथमिकता पर किया जाएगा। जिलाधिकारी, जो कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे, ने कहा कि पेंशनरों की समस्याओं का समाधान यथासंभव समयबद्ध तरीके से किया जाएगा। उन्होंने कार्यालयाध्यक्षों को निर्देश दिया कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कार्यालय में आमंत्रित कर उनके अनुभवों से मार्गदर्शन प्राप्त किया जाए।
इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक नगर, जिला सूचना अधिकारी, विभागों के कार्यालयाध्यक्ष, आहरण वितरण अधिकारी, और लगभग 250 पेंशनर्स उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कोषाधिकारी उमाशंकर ने किया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पेंशनरों की समस्याओं का समाधान और उनके योगदान को सम्मानित करना था।
