वन नेशन, वन इलेक्शन’ विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश नहीं होगा
“वन नेशन, वन इलेक्शन विधेयक: ताज़ा स्थिति“
मुख्य बिंदु:
- कार्यसूची से हटाया गया विधेयक:
- वन नेशन, वन इलेक्शन विधेयक को सोमवार को लोकसभा में पेश नहीं किया जाएगा।
- संशोधित कार्य सूची में इस विधेयक का उल्लेख नहीं किया गया, जबकि पहले इसे सोमवार के एजेंडे में शामिल किया गया था।
- अर्जुन राम मेघवाल को इस विधेयक को पेश करना था।
- संशोधन विधेयक 2024:
- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 भी सोमवार को पेश किया जाना था।
- इस विधेयक में निम्नलिखित अधिनियमों में संशोधन का प्रस्ताव है:
- केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम, 1963
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली अधिनियम, 1991
- जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019
- प्रमुख सिफारिशें और रिपोर्ट:
- वन नेशन, वन इलेक्शन का उद्देश्य लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराना है।
- यह सुझाव पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट पर आधारित है।
- रिपोर्ट में बताया गया कि:
- नीतिगत स्थिरता सुनिश्चित होगी।
- मतदाता थकान कम होगी।
- चुनावी भागीदारी में वृद्धि होगी।
- यह रिपोर्ट 191 दिनों में तैयार की गई और 18,626 पन्नों की है।
- विपक्ष की प्रतिक्रिया:
- कई विपक्षी नेताओं ने इस विधेयक को अव्यवहारिक और संघीय ढांचे के लिए खतरा बताया।
- उन्होंने शीतकालीन सत्र में इस बिल को जल्दबाजी में पेश करने की योजना पर सवाल उठाए।
- गोवा पुनर्समायोजन विधेयक, 2024:
- संशोधित कार्य सूची में गोवा राज्य के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों का प्रतिनिधित्व पुनर्समायोजन विधेयक, 2024 शामिल है।
- यह गोवा की विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण सुनिश्चित करता है।
- विधेयक में अनुसूचित जनजातियों की सूची में हाल के परिवर्तनों के आधार पर सीटों का पुनर्समायोजन किया जाएगा।
- शीतकालीन सत्र का समय:
- शीतकालीन सत्र 20 दिसंबर को समाप्त होने वाला है।
- संभावना है कि ये विधेयक अंतिम समय में पूरक कार्य सूची के माध्यम से पेश किए जा सकते हैं।
निष्कर्ष:
वन नेशन, वन इलेक्शन और केंद्र शासित प्रदेश विधेयकों पर अस्थाई विराम है, लेकिन इन विधेयकों का संसद में पेश किया जाना शीतकालीन सत्र के अंतिम दिनों में संभव है। साथ ही, गोवा पुनर्समायोजन विधेयक फिलहाल कार्यसूची में शामिल है।
