मुरैना- 25 वयस्क घडियाल चम्बल नदी में विचरण के लिये छोड़े गये
“चम्बल नदी में घड़ियाल संरक्षण: मुरैना में घड़ियालों की संख्या में लगातार वृद्धि”
मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभ्यारण्य में पिछले पांच दशकों से विलुप्तप्राय जलीय जीव घड़ियाल का संरक्षण और संवर्धन किया जा रहा है। इस प्रयास के तहत हाल ही में 25 वयस्क घड़ियालों को चम्बल नदी में विचरण के लिए छोड़ा गया है। वर्तमान में अभ्यारण्य में लगभग 2,480 घड़ियाल हैं, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।
इस साल 98 घड़ियालों को चम्बल नदी के विभिन्न घाटों पर छोड़े जाने की योजना है। अब तक इनमें से 73 घड़ियाल नदी में छोड़े जा चुके हैं। अगले कुछ दिनों में बाकी घड़ियालों को भी नदी में छोड़ दिया जाएगा, जिससे चम्बल में घड़ियालों की संख्या 2,550 से अधिक हो जाएगी।
हाल ही में देवरी घड़ियाल अभ्यारण्य केंद्र की टीम 25 घड़ियाल लेकर राजघाट के जेतपुर घाट पहुंची। यहां जिला वनमंडल अधिकारी सुजीत पाटिल ने इन घड़ियालों को नदी में छोड़ा। इन घड़ियालों में 4 नर और 21 मादा शामिल हैं।
घड़ियाल संरक्षण का इतिहास
चम्बल नदी के घड़ियालों के संरक्षण के लिए 1980 में राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभ्यारण्य की स्थापना की गई थी। इस अभ्यारण्य का 435 किलोमीटर लंबा क्षेत्र मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश के हिस्सों में फैला है। घड़ियालों के सुरक्षित आवास को सुनिश्चित करने के लिए इस क्षेत्र में रेत और मिट्टी के खनन पर प्रतिबंध लगाया गया है।
वन विभाग द्वारा संचालित देवरी घड़ियाल केंद्र में हर साल चम्बल नदी के विभिन्न घाटों से लगभग 200 अंडे एकत्र किए जाते हैं। इन अंडों को प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रखा जाता है। अंडों से निकलने के बाद बच्चों को तीन साल तक विशेष देखभाल में रखा जाता है। जब घड़ियाल 1.20 मीटर लंबाई के हो जाते हैं, तब उन्हें चम्बल नदी के विभिन्न घाटों पर छोड़ा जाता है।
घड़ियालों की सतत निगरानी
नदी में छोड़े गए घड़ियालों पर लगभग एक साल तक निगरानी रखी जाती है। उनके आवास, भोजन और व्यवहार का अध्ययन करने के लिए उनकी पूंछ पर टैग लगाया जाता है। यह टैग उनकी गतिविधियों की जानकारी प्रदान करता है, जिससे संरक्षण प्रक्रिया में मदद मिलती है।
चम्बल नदी में घड़ियालों की संख्या बढ़ाने के इस प्रयास का उद्देश्य घड़ियाल प्रजाति के अस्तित्व को बचाना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना है। संरक्षण प्रयासों के चलते अब चम्बल नदी भारत में घड़ियालों के लिए एक महत्वपूर्ण निवास स्थान बन गया है।
वन विभाग के अधिकारी इस परियोजना को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। घड़ियाल संरक्षण से न केवल जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण कदम है।
