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भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए नए व्यापार समझौते से luxury carmakers को बड़ी राहत मिली है। इस डील के तहत हाई-एंड यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है। पहले यही शुल्क 70 से 110 प्रतिशत तक था। इस बदलाव से भारतीय ऑटो बाजार में नई हलचल देखी जा रही है।
भारत लंबे समय से दुनिया के सबसे संरक्षित ऑटो बाजारों में शामिल रहा है। ऊंचे टैरिफ के कारण विदेशी ब्रांड्स की पहुंच सीमित थी। लेकिन अब luxury carmakers जैसे BMW और Mercedes-Benz के लिए भारतीय बाजार में विस्तार के रास्ते खुलते दिख रहे हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, हर साल 1 लाख तक पारंपरिक पेट्रोल और डीज़ल कारों के आयात पर यह नई दर लागू होगी। ये कारें अलग-अलग मूल्य श्रेणियों में आएंगी। हालांकि, टैरिफ को भविष्य में और घटाकर 10 प्रतिशत तक लाने की भी योजना है।
इस फैसले का असर उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। माना जा रहा है कि लग्ज़री कारों की कीमतों में कमी आ सकती है। इससे प्रीमियम सेगमेंट में विकल्प बढ़ेंगे और प्रतिस्पर्धा तेज होगी।
घरेलू कंपनियों के लिए यह चुनौती और अवसर दोनों है। उन्हें अब गुणवत्ता और तकनीक पर ज्यादा ध्यान देना होगा। यह विश्लेषण आपके लिए प्रस्तुत किया गया है vishwashprakash | Amit kumar के माध्यम से।
❓ FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. luxury carmakers को इस डील से क्या फायदा होगा?
कम आयात शुल्क से उनकी कारें भारत में सस्ती होंगी।
Q2. नया टैरिफ कितना है?
हाई-एंड कारों पर आयात शुल्क 30 प्रतिशत किया गया है।
Q3. क्या आगे और कटौती होगी?
सरकार भविष्य में इसे 10 प्रतिशत तक घटाने पर विचार कर रही है।