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रांची: झारखंड सामान्य स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (JGGLCCE) के मद्देनजर हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य में 21 और 22 सितंबर को मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद रखने का फैसला किया है। यह कदम परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की पेपर लीक की घटना को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि, इस फैसले से सरकार पर राजनीतिक और सामाजिक दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि आम जनता और कई वर्गों ने इस कदम का विरोध किया है।
इंटरनेट बंदी के कारण राज्य में आम नागरिकों के दैनिक कार्यों में रुकावट पैदा हो रही है। छात्र, व्यापारी, और डिजिटल सेवाओं पर निर्भर रहने वाले लोग इस फैसले से खासे नाराज हैं। इसके अलावा, कुछ राजनीतिक दल और सामाजिक संगठनों ने भी इस कदम की आलोचना की है, इसे जनता के अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए सरकार की कड़ी निंदा की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाना किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है, और यह कदम हेमंत सोरेन सरकार पर भारी पड़ सकता है। पेपर लीक रोकने के लिए अन्य सुरक्षा उपायों को अपनाने की मांग की जा रही है, ताकि आम नागरिकों को असुविधा न हो और परीक्षा भी सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
सोशल मीडिया पर भी लोगों की नाराजगी साफ देखी जा सकती है। कई लोगों ने इसे सरकार की नाकामी बताते हुए कहा है कि पेपर लीक को रोकने के लिए इस प्रकार के कठोर कदम उठाने की बजाय बेहतर तकनीकी और सुरक्षा उपायों का सहारा लिया जाना चाहिए था।
अब देखना होगा कि इस फैसले से सरकार को कैसे निपटना पड़ेगा और इसका जनता पर क्या प्रभाव पड़ता है।