ऑपरेशन सिंदूर’ में स्वदेशी सैन्य तकनीक ने दिखाया दमखम
“ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत द्वारा इस्तेमाल की गई स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का लोहा पूरी दुनिया मान रही है“
ऑपरेशन सिंदूर के सफल संचालन के बाद भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है। सैन्य रणनीति और शहरी युद्ध के विशेषज्ञ, और न्यूयॉर्क स्थित मॉडर्न वॉर इंस्टीट्यूट के प्रमुख जॉन स्पेंसर ने भारत की रक्षा ताकत की जमकर तारीफ की है।
स्पेंसर के अनुसार, भारत द्वारा विकसित और इस्तेमाल किए गए हथियार और रक्षा प्रणालियाँ न केवल प्रभावशाली थीं, बल्कि तकनीकी रूप से भी उन चीनी हथियारों से बेहतर साबित हुईं जिन्हें पाकिस्तान ने युद्ध में इस्तेमाल किया। उन्होंने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम, और रुद्रम एंटी-रेडिएशन मिसाइल जैसे हथियारों को उल्लेखनीय बताया।
इसके अलावा, भारत के SkyStriker, Harop ड्रोन, नेत्रा AEW&C सिस्टम, UAV प्रणाली, M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर, T-72 मेन बैटल टैंक, और ज़ोरावर लाइट टैंक जैसे स्वदेशी और कुछ संयुक्त विकास वाले सिस्टम्स का भी उन्होंने विशेष रूप से जिक्र किया। स्पेंसर ने कहा कि ये सभी प्रणालियाँ युद्ध के दौरान निर्णायक साबित हुईं।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत ने इस ऑपरेशन में एक सच्चे संप्रभु राष्ट्र की तरह पेशेवर रणनीति के साथ लड़ाई लड़ी। देश ने अपने स्वयं के विकसित हथियारों पर भरोसा करते हुए तकनीक, डेटा और वास्तविक समय की क्षमताओं का प्रभावी इस्तेमाल किया। इसके विपरीत, पाकिस्तान की सेना मुख्य रूप से चीन द्वारा बनाए गए ऐसे उपकरणों पर निर्भर थी, जो गुणवत्ता की बजाय निर्यात के उद्देश्य से बनाए गए थे। नतीजा यह हुआ कि जब आमने-सामने की लड़ाई हुई, तो पाकिस्तान की कमजोरी खुलकर सामने आ गई।
इस सैन्य अभियान का प्रभाव केवल युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। भारत की रक्षा कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों ने भारतीय तकनीक और आत्मनिर्भरता में भरोसा जताया है। वहीं, चीन के रक्षा शेयरों में तेज गिरावट देखी गई।
स्पेंसर ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह भारत की तकनीकी क्षमता, बाजार में मजबूती और रणनीतिक सोच का प्रदर्शन था। यह अभियान भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल की असली ताकत को दर्शाता है।
