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“रणधीर जायसवाल: जम्मू-कश्मीर पर फैसला सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच ही संभव, ऑपरेशन सिंदूर बना नई रणनीति की मिसाल“
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ा कोई भी मामला भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय रूप से ही सुलझाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो मुद्दा अब तक लंबित है, वह केवल पाकिस्तान द्वारा अवैध कब्जे में रखे गए क्षेत्रों से संबंधित है।
10 मई की कार्रवाई और पाकिस्तानी रुख में बदलाव
रणधीर जायसवाल ने बताया कि 10 मई की सुबह भारत द्वारा पाकिस्तानी वायुसेना के प्रमुख ठिकानों पर एक सटीक और प्रभावी कार्रवाई की गई थी। इस सैन्य प्रतिक्रिया के बाद पाकिस्तान ने गोलीबारी और संघर्षविराम के प्रति सहमति जताई। उन्होंने कहा कि भारत ने सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह स्पष्ट किया है कि उसका निशाना आतंकवाद के ढांचे हैं, लेकिन यदि पाकिस्तान की सेना कोई कार्रवाई करती है तो भारतीय सेना उसका माकूल जवाब देगी।
सिंधु जल संधि पर सख्त रुख
भारत ने सिंधु जल समझौते को तब तक स्थगित रखने का निर्णय लिया है, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता। यह भारत का कड़ा और स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षा प्राथमिकताओं के आगे कोई संधि स्थायी नहीं है।
ऑपरेशन सिंदूर: एक निर्णायक अभियान
रणधीर जायसवाल ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई को हुई, और यह अभियान 10 मई तक चला, जब दोनों देशों में गोलीबारी रोकने पर सहमति बनी। इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच सैन्य हालात पर लगातार संवाद होता रहा, हालांकि इन चर्चाओं में व्यापार से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं उठाया गया।
पाकिस्तान को चेतावनी: आतंकवाद का समर्थन भारी पड़ेगा
प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान ने औद्योगिक स्तर पर आतंकवाद को बढ़ावा दिया है और अब उससे जुड़ी जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता। उन्होंने साफ किया कि ऐसी सैन्य कार्रवाइयाँ अब ‘न्यू नार्मल’ बन चुकी हैं, जिनकी आदत पाकिस्तान को डालनी होगी।
परमाणु धमकियों से भारत नहीं डरेगा
रणधीर जायसवाल ने दो टूक कहा कि भारत किसी भी प्रकार के परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा और ऐसी धमकियों को सीमा पार आतंकवाद का ढाल नहीं बनने देगा।