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भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8% पर पहुंची, अर्थशास्त्रियों ने जताई खुशी

भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8% पर पहुँची, अर्थशास्त्रियों ने बताया मजबूती का संकेत

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत तक पहुँच गई है। यह दर पिछले वर्ष की समान अवधि में दर्ज 6.5 प्रतिशत से कहीं अधिक है। इस उपलब्धि को विशेषज्ञों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और सकारात्मक रुझान का संकेत माना है।

सीआईआई के वरिष्ठ समिति सदस्य अशोक सहगल ने कहा कि इस वृद्धि के पीछे दो प्रमुख कारण हैं—पहला, वैश्विक स्तर पर टैरिफ लागू होने की आशंका के चलते निर्यातकों ने समय से पहले निर्यात बढ़ा दिए और दूसरा, उन क्षेत्रों में तेजी आई जो टैरिफ से अधिक प्रभावित हो सकते थे।

आर्थिक विशेषज्ञ प्रो. यशवीर त्यागी ने इसे उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन बताया और कहा कि भारत वैश्विक और घरेलू चुनौतियों के बावजूद दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है।

सौराष्ट्र विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुरेश भाई परदवा ने अच्छे मानसून और कृषि उत्पादन को इस वृद्धि का मुख्य कारण बताया। उनके अनुसार कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र सभी ने इसमें योगदान दिया है, हालांकि उन्होंने वैश्विक अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति को लेकर सतर्कता की सलाह भी दी।

जीएम विश्वविद्यालय के डॉ. उमा चरण पति ने इस वृद्धि को “सकारात्मक और अपेक्षित” परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में हुए सुधार, पूंजीगत व्यय में तेज़ बढ़ोतरी और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) जैसी योजनाओं ने ग्रामीण आय और खपत को मज़बूती दी है। साथ ही, जीएसटी संग्रह में 10.7 प्रतिशत की वृद्धि भी मजबूत आर्थिक गतिविधियों का संकेत है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छे मानसून और बंपर फसल की संभावना आने वाले महीनों में भारत की विकास दर को और गति प्रदान कर सकती है।

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