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“भारत की कॉटन यार्न इंडस्ट्री को फिर से मिली रफ्तार, चालू वित्त वर्ष में 7-9% वृद्धि की उम्मीद“
नई दिल्ली – घरेलू बाजार में मजबूत मांग और निर्यात में दोबारा उछाल की वजह से भारत की कॉटन यार्न इंडस्ट्री चालू वित्त वर्ष (2024-25) में 7 से 9 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। यह जानकारी क्रिसिल की हालिया रिपोर्ट में दी गई है। पिछले वित्त वर्ष में यह वृद्धि केवल 2-4 प्रतिशत थी।
कीमतों और आपूर्ति ने दी सहारा
रिपोर्ट के अनुसार, यार्न की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी और भारतीय कपास निगम (CCI) के ज़रिए बेहतर कपास आपूर्ति के चलते ऑपरेटिंग मार्जिन में 50-100 आधार अंकों (bps) की बढ़त होने की संभावना है। यह कपास की स्थिर उपलब्धता और लागत नियंत्रण के कारण संभव हो पाया है।
70 प्रमुख स्पिनरों पर आधारित अध्ययन
इस रिपोर्ट का आधार 70 बड़े कॉटन यार्न स्पिनिंग कंपनियों का विश्लेषण है, जो कि इस इंडस्ट्री की कुल आय में करीब 35-40 प्रतिशत का योगदान देती हैं।
निर्यात की वापसी, चीन से उम्मीदें
क्रिसिल ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 में इंडस्ट्री की आमदनी में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण चीन को निर्यात में तेजी होगा। अभी भारत के कुल यार्न निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत है और कुल निर्यात का 30 प्रतिशत हिस्सा इंडस्ट्री की आय में योगदान देता है।
पिछले साल (FY25) चीन में कॉटन उत्पादन अधिक होने के कारण भारत से निर्यात घटा था, जिससे 5-7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। मगर इस वर्ष चीन को यार्न निर्यात में 9-11 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना जताई गई है।
मुनाफे में भी सुधार की संभावना
क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक गौतम शाही ने बताया कि चालू कॉटन सीजन में भारत में स्थिर कपास उत्पादन और CCI की सक्रियता के चलते स्पिनिंग कंपनियों को फायदा मिल सकता है। इसके कारण, वित्त वर्ष 2025 में 100-150 बीपीएस की रिकवरी के बाद इस साल मुनाफे में और 50-100 बीपीएस की वृद्धि होने की उम्मीद है।