रूस से तेल आयात पर संकट: क्या भारत पर घटेगा रूस का भरोसा?
🇮🇳🇷🇺 तेल ख़रीद ‘बंद’ करने से रूस पर भारत का भरोसा कमजोर होगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि भारत रूस से कच्चे तेल की ख़रीद बंद करने पर सहमत हो गया है। हालांकि भारत सरकार की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है।
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत और रूस के रिश्तों में ऊर्जा व्यापार सबसे मजबूत कड़ी बनकर उभरा था। रूस से सस्ते कच्चे तेल की आपूर्ति ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती दी, लेकिन अब तेल ख़रीद बंद करने की चर्चा दोनों देशों के भरोसे पर सवाल खड़े कर रही है।
वित्त वर्ष 2024–25 में भारत ने रूस से 52 अरब डॉलर से अधिक का कच्चा तेल आयात किया। इसी वजह से दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंध, ऊँचे टैरिफ़ और वैश्विक दबाव के चलते भारत धीरे-धीरे वैकल्पिक देशों की ओर रुख कर रहा है।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि रूस से तेल आयात में गिरावट बाजार आधारित कारणों से हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पूरी तरह तेल ख़रीद बंद नहीं करेगा, लेकिन मात्रा घटाना एक रणनीतिक कदम हो सकता है।
भारत की विदेश नीति हमेशा संतुलन पर टिकी रही है। रूस से रिश्ते अहम हैं, लेकिन अमेरिका के साथ व्यापार, तकनीक और निवेश भी उतने ही ज़रूरी हैं। ऐसे में भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए निर्णय ले रहा है।
vishwashprakash | Amit kumar के अनुसार, यह मामला सिर्फ तेल का नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक छवि से भी जुड़ा हुआ है।
FAQ
Q1. क्या भारत रूस से तेल ख़रीद पूरी तरह बंद करेगा?
नहीं, फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।
Q2. तेल आयात घटने का मुख्य कारण क्या है?
अमेरिकी प्रतिबंध, टैरिफ़ दबाव और सप्लाई विविधता।
Q3. क्या इससे भारत-रूस संबंध खराब होंगे?
संबंध प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन पूरी तरह टूटने की संभावना कम है।
